Correct Answer:
Option A - डिप्थीरिया संक्रामक रोग है, जो 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु के बालकों को अधिक होता है। इस रोग का कारण Corynobacterium diphtheriae नामक जीवाणु होता है। नाक का बहना, गले में दर्द, बुखार आदि इस रोग का लक्षण है। डिप्थीरिया रोग के निदान के लिए स्किन परीक्षण किया जाता है।
नोट- डिप्थीरिया से सुरक्षा के लिए बच्चों को डीपीटी का टीका लगवाना चाहिए।
खसरा (Measles)- खसरा मुख्यत: बच्चों का रोग है। यह एक विषाणु जनित रोग है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। इसमें शरीर में लाल रंग के चकत्ते उभर आते है।
लक्षण- बुखार, खांसी, नाक बहना आदि।
रूबेला (Rubella)-रूबेला को ‘जर्मन खसरा’ के रूप में जाना जाता है और यह रूबेला वायरस के कारण होता है।
लक्षण- बुखार सिर दर्द, लसिका ग्रन्थियों का बढ़ना आदि।
मम्प्स (Mumps)- मम्प्स एक तीव्र संक्रामक रोग है। इसका संक्रमण वाइरस द्वारा होता है, जो पैरोटिड एवं अन्य लार ग्रन्थियों को प्रभावित करता है। थूक के कण के संक्रमण द्वारा फैलने वाली तीव्र बीमारी है।
A. डिप्थीरिया संक्रामक रोग है, जो 2 से लेकर 10 वर्ष तक की आयु के बालकों को अधिक होता है। इस रोग का कारण Corynobacterium diphtheriae नामक जीवाणु होता है। नाक का बहना, गले में दर्द, बुखार आदि इस रोग का लक्षण है। डिप्थीरिया रोग के निदान के लिए स्किन परीक्षण किया जाता है।
नोट- डिप्थीरिया से सुरक्षा के लिए बच्चों को डीपीटी का टीका लगवाना चाहिए।
खसरा (Measles)- खसरा मुख्यत: बच्चों का रोग है। यह एक विषाणु जनित रोग है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलता है। इसमें शरीर में लाल रंग के चकत्ते उभर आते है।
लक्षण- बुखार, खांसी, नाक बहना आदि।
रूबेला (Rubella)-रूबेला को ‘जर्मन खसरा’ के रूप में जाना जाता है और यह रूबेला वायरस के कारण होता है।
लक्षण- बुखार सिर दर्द, लसिका ग्रन्थियों का बढ़ना आदि।
मम्प्स (Mumps)- मम्प्स एक तीव्र संक्रामक रोग है। इसका संक्रमण वाइरस द्वारा होता है, जो पैरोटिड एवं अन्य लार ग्रन्थियों को प्रभावित करता है। थूक के कण के संक्रमण द्वारा फैलने वाली तीव्र बीमारी है।