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Q: The reinforcement in RCC beam is usually placed at
  • A. bottom fibre/निचला फाइबर
  • B. top fibre/ऊपरी फाइबर
  • C. top and bottom fibre/ऊपरी तथा निचला फाइबर
  • D. side fibre/पार्श्व फाइबर
Correct Answer: Option C - धरन में प्रबलन उपरी तथा निचले फाइबर में प्रदान किया जाता है। एकल प्रबलित धरन-जब प्रबलन केवल तनन क्षेत्र में प्रदान किया गया हो तो उसे एकल प्रबलित धरन कहते हैं। दोहरे प्रबलित धरन- इस प्रकार के धरन में प्रबलन सम्पीडन तथा तनन दोनों क्षेत्रों में प्रदान किया जाता है। इस प्रकार के धरन का निर्माण निम्न स्थितियों में किया जाता है– (i) जब धरन खण्ड का आकार निश्चित कर दिया गया हो अर्थात धरन खण्ड का आकार बढ़ाया न जा सकता है। (ii) जब धरन में प्रतिबल के प्रत्यावर्तन की संभावना हो। (iii) जब धरन पर अधिक भार आता हो।
C. धरन में प्रबलन उपरी तथा निचले फाइबर में प्रदान किया जाता है। एकल प्रबलित धरन-जब प्रबलन केवल तनन क्षेत्र में प्रदान किया गया हो तो उसे एकल प्रबलित धरन कहते हैं। दोहरे प्रबलित धरन- इस प्रकार के धरन में प्रबलन सम्पीडन तथा तनन दोनों क्षेत्रों में प्रदान किया जाता है। इस प्रकार के धरन का निर्माण निम्न स्थितियों में किया जाता है– (i) जब धरन खण्ड का आकार निश्चित कर दिया गया हो अर्थात धरन खण्ड का आकार बढ़ाया न जा सकता है। (ii) जब धरन में प्रतिबल के प्रत्यावर्तन की संभावना हो। (iii) जब धरन पर अधिक भार आता हो।

Explanations:

धरन में प्रबलन उपरी तथा निचले फाइबर में प्रदान किया जाता है। एकल प्रबलित धरन-जब प्रबलन केवल तनन क्षेत्र में प्रदान किया गया हो तो उसे एकल प्रबलित धरन कहते हैं। दोहरे प्रबलित धरन- इस प्रकार के धरन में प्रबलन सम्पीडन तथा तनन दोनों क्षेत्रों में प्रदान किया जाता है। इस प्रकार के धरन का निर्माण निम्न स्थितियों में किया जाता है– (i) जब धरन खण्ड का आकार निश्चित कर दिया गया हो अर्थात धरन खण्ड का आकार बढ़ाया न जा सकता है। (ii) जब धरन में प्रतिबल के प्रत्यावर्तन की संभावना हो। (iii) जब धरन पर अधिक भार आता हो।