Correct Answer:
Option B - बाह्योत्थान (Super elevation or Cant)– जब वाहन वक्र पर घूमता है, तो इस पर अपकेन्द्री बल लगता है। यह अपकेन्द्री बल, बाहरी रेल पर क्षैतिज बल उत्पन्न करता है, जिस कारण बाहरी रेल पर अधिक भार पड़ता है। इस अधिक व असन्तुलित भार के कारण गाड़ी के पटरी से उतर जाने की सम्भावना रहती है। इस अपकेन्द्री बल को उदासीन करने के लिए अभिकेन्द्री बल उत्पन्न करना होता है।
■ अत: वक्रों पर, अपकेन्द्री बल के प्रभाव को उदासीन करने के लिए, बाहरी रेल को भीतरी रेल की अपेक्षा कुछ ऊपर उठा दिया जाता है। इसको बाह्योत्थान या कैंट (Cant) कहते हैं।
■ जब बाह्योत्थान गाड़ी की चाल के अनुसार दिया जाता है, तो इसे संतुलित बाह्योत्थान (equilibrium cant) कहते हैं। इसमें पाश्र्व बल और पहिया भार लगभग समान होते हैं।
B. बाह्योत्थान (Super elevation or Cant)– जब वाहन वक्र पर घूमता है, तो इस पर अपकेन्द्री बल लगता है। यह अपकेन्द्री बल, बाहरी रेल पर क्षैतिज बल उत्पन्न करता है, जिस कारण बाहरी रेल पर अधिक भार पड़ता है। इस अधिक व असन्तुलित भार के कारण गाड़ी के पटरी से उतर जाने की सम्भावना रहती है। इस अपकेन्द्री बल को उदासीन करने के लिए अभिकेन्द्री बल उत्पन्न करना होता है।
■ अत: वक्रों पर, अपकेन्द्री बल के प्रभाव को उदासीन करने के लिए, बाहरी रेल को भीतरी रेल की अपेक्षा कुछ ऊपर उठा दिया जाता है। इसको बाह्योत्थान या कैंट (Cant) कहते हैं।
■ जब बाह्योत्थान गाड़ी की चाल के अनुसार दिया जाता है, तो इसे संतुलित बाह्योत्थान (equilibrium cant) कहते हैं। इसमें पाश्र्व बल और पहिया भार लगभग समान होते हैं।