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Q: The publication of the book ‘‘Poverty and Un-British Rule in India’’ by Dadabhai Naoroji in 1901 was instrumental in:/1901 में दादाभाई नौरोजी की पुस्तक ‘‘पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इण्डिया’’ के प्रकाशन में सहायक भूमिका निभाई गई
  • A. Highlighting the economic exploitation of India by British colonialism/ब्रिटिश उपनिवेशवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण पर प्रकाश डालना
  • B. Advocating for the abolition of the caste system/जाति व्यवस्था के उन्मूलन की वकालत करना
  • C. Propagating the idea of separate electorates for Muslims/मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र के विचार का प्रचार करना
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above/उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - धन निकास के सिद्धान्त (Drain of wealth) का उल्लेख दादाभाई नौरोजी ने अपने लेख 'England Debt to India' में किया था। यह लेख 1867 को लन्दन में आयोजित ईस्ट इंडिया ऐसोसिएशन की बैठक में प्रस्तुत किया था। 1901 में प्रकाशित पुस्तक ‘‘पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इण्डिया’’ के प्रकाशन में ब्रिटिश उपनिवेशवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण पर प्रकाश डालने में सहायक भूमिका निभाई जबकि जाति व्यवस्था के उन्मूलन व मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन के क्षेत्र के विचार का प्रसार का इस पुस्तक के प्रकाशन में किसी भी प्रकार की सहायक भूमिका नहीं थी।
A. धन निकास के सिद्धान्त (Drain of wealth) का उल्लेख दादाभाई नौरोजी ने अपने लेख 'England Debt to India' में किया था। यह लेख 1867 को लन्दन में आयोजित ईस्ट इंडिया ऐसोसिएशन की बैठक में प्रस्तुत किया था। 1901 में प्रकाशित पुस्तक ‘‘पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इण्डिया’’ के प्रकाशन में ब्रिटिश उपनिवेशवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण पर प्रकाश डालने में सहायक भूमिका निभाई जबकि जाति व्यवस्था के उन्मूलन व मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन के क्षेत्र के विचार का प्रसार का इस पुस्तक के प्रकाशन में किसी भी प्रकार की सहायक भूमिका नहीं थी।

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धन निकास के सिद्धान्त (Drain of wealth) का उल्लेख दादाभाई नौरोजी ने अपने लेख 'England Debt to India' में किया था। यह लेख 1867 को लन्दन में आयोजित ईस्ट इंडिया ऐसोसिएशन की बैठक में प्रस्तुत किया था। 1901 में प्रकाशित पुस्तक ‘‘पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इण्डिया’’ के प्रकाशन में ब्रिटिश उपनिवेशवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण पर प्रकाश डालने में सहायक भूमिका निभाई जबकि जाति व्यवस्था के उन्मूलन व मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन के क्षेत्र के विचार का प्रसार का इस पुस्तक के प्रकाशन में किसी भी प्रकार की सहायक भूमिका नहीं थी।