Correct Answer:
Option B - भारविकृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग के प्रथम श्लोक में कहा गया है – ‘‘युधिष्ठिरं द्वैतवने वनेचर:।’’ अर्थात् ब्रह्मचारी का वेष धारण करने वाला वनेचर सारा वृतान्त जानकर द्वैतवन में युधिष्ठिर के पास आया।
B. भारविकृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग के प्रथम श्लोक में कहा गया है – ‘‘युधिष्ठिरं द्वैतवने वनेचर:।’’ अर्थात् ब्रह्मचारी का वेष धारण करने वाला वनेचर सारा वृतान्त जानकर द्वैतवन में युधिष्ठिर के पास आया।