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Q: The maximum heat in resistance welding is at the– प्रतिरोध वेल्डिंग में अधिकतम ऊष्मा कहाँ मौजूद होती है?
  • A. Top surface of the plate at the time of electric contact with the electrode/इलेक्ट्रोड के साथ विद्युत सम्पर्क के समय प्लेट की ऊपरी सतह पर
  • B. Interface between the two plates being joined/जोड़ी जाने वाली दो प्लेटों के बीच के इंटरफेस पर सतह पर
  • C. Tip of the positive electrode धनात्मक इलेक्ट्रोड की नोक पर
  • D. Tip of the negative electrode ऋणात्मक इलेक्ट्रोड की नोक पर
Correct Answer: Option B - प्रतिरोध वेल्डिंग में अधिकतम ऊष्मा जोड़ी जाने वाली दोनों प्लेटों के बीच के इंटरफेस पर मौजूद होती है क्योंकि यहाँ प्रतिरोध ज्यादा होने के कारण ज्यादा ऊष्मा उत्पन्न होती है। यांत्रिक दाब के अंतर्गत धातु खण्ड के उच्च धारा प्रवाह तथा उच्च सम्पर्क प्रतिरोध के कारण उत्पन्न ताप से पिघलकर जुड़ने की क्रिया को रेजिस्टेस वेल्डिंग कहते हें। वास्तव में यह एक प्रकार की दाब वेल्डन है, जिसमें धातु खण्डों के पिघलने के लिए आवश्यक ऊष्मा, जुड़ने वाले दो पृष्ठों के बीच सम्पर्क प्रतिरोध से होकर बहने वाली विद्युत धारा से उत्पन्न होती है। इसे प्लास्टिक वेल्डिंग भी कहते हैं।
B. प्रतिरोध वेल्डिंग में अधिकतम ऊष्मा जोड़ी जाने वाली दोनों प्लेटों के बीच के इंटरफेस पर मौजूद होती है क्योंकि यहाँ प्रतिरोध ज्यादा होने के कारण ज्यादा ऊष्मा उत्पन्न होती है। यांत्रिक दाब के अंतर्गत धातु खण्ड के उच्च धारा प्रवाह तथा उच्च सम्पर्क प्रतिरोध के कारण उत्पन्न ताप से पिघलकर जुड़ने की क्रिया को रेजिस्टेस वेल्डिंग कहते हें। वास्तव में यह एक प्रकार की दाब वेल्डन है, जिसमें धातु खण्डों के पिघलने के लिए आवश्यक ऊष्मा, जुड़ने वाले दो पृष्ठों के बीच सम्पर्क प्रतिरोध से होकर बहने वाली विद्युत धारा से उत्पन्न होती है। इसे प्लास्टिक वेल्डिंग भी कहते हैं।

Explanations:

प्रतिरोध वेल्डिंग में अधिकतम ऊष्मा जोड़ी जाने वाली दोनों प्लेटों के बीच के इंटरफेस पर मौजूद होती है क्योंकि यहाँ प्रतिरोध ज्यादा होने के कारण ज्यादा ऊष्मा उत्पन्न होती है। यांत्रिक दाब के अंतर्गत धातु खण्ड के उच्च धारा प्रवाह तथा उच्च सम्पर्क प्रतिरोध के कारण उत्पन्न ताप से पिघलकर जुड़ने की क्रिया को रेजिस्टेस वेल्डिंग कहते हें। वास्तव में यह एक प्रकार की दाब वेल्डन है, जिसमें धातु खण्डों के पिघलने के लिए आवश्यक ऊष्मा, जुड़ने वाले दो पृष्ठों के बीच सम्पर्क प्रतिरोध से होकर बहने वाली विद्युत धारा से उत्पन्न होती है। इसे प्लास्टिक वेल्डिंग भी कहते हैं।