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Q: The law of exercise is among the three laws of learning. Who developed these laws? अभ्यास का नियम सीखने के तीन नियमों में से एक है। इन नियमों को किसने विकसित किया?
  • A. Jean Piaget/जीन पियाजे
  • B. Rabindranath Tagore/रवींद्रनाथ टैगोर
  • C. Sigmund Freud/सिगमंड फ्रायड
  • D. E.L Thorndike/इ. एल. थार्नडाइक
Correct Answer: Option D - एडवर्ड. ली. थॉर्नडाइक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने सीखने के तीन नियम बताएँ हैं– (1) तत्परता का नियम (Law of Readiness)– किसी समस्या को हल करने के लिए प्रयत्नशील होना तत्परता कहलाता है। जैसे यदि बच्चे में गणित के प्रश्न हल करने की इच्छा है तो तत्परता के कारण वह उनको अधिक शीघ्रता से और कुशलता से करता है। (2) अभ्यास का नियम (Law of Exercise)– अभ्यास से सीखना स्थाई होता है, क्योंकि यदि हम किसी सीखे हुए कार्य का अभ्यास नहीं करते हैं, तो उसे शीघ्र ही भूल जाते हैं। अत: अभ्यास हमें कुशल बनाता है। (3) प्रभाव का निमय (Law of Effect) – थॉर्नडाइक के अनुसार हम उस कार्य को ज्यादा अच्छे से करना चाहते है जिसका परिणाम हमारे लिए हितकर होता है, जिससे हमें सुख व सन्तोष मिलता है।
D. एडवर्ड. ली. थॉर्नडाइक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने सीखने के तीन नियम बताएँ हैं– (1) तत्परता का नियम (Law of Readiness)– किसी समस्या को हल करने के लिए प्रयत्नशील होना तत्परता कहलाता है। जैसे यदि बच्चे में गणित के प्रश्न हल करने की इच्छा है तो तत्परता के कारण वह उनको अधिक शीघ्रता से और कुशलता से करता है। (2) अभ्यास का नियम (Law of Exercise)– अभ्यास से सीखना स्थाई होता है, क्योंकि यदि हम किसी सीखे हुए कार्य का अभ्यास नहीं करते हैं, तो उसे शीघ्र ही भूल जाते हैं। अत: अभ्यास हमें कुशल बनाता है। (3) प्रभाव का निमय (Law of Effect) – थॉर्नडाइक के अनुसार हम उस कार्य को ज्यादा अच्छे से करना चाहते है जिसका परिणाम हमारे लिए हितकर होता है, जिससे हमें सुख व सन्तोष मिलता है।

Explanations:

एडवर्ड. ली. थॉर्नडाइक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होंने सीखने के तीन नियम बताएँ हैं– (1) तत्परता का नियम (Law of Readiness)– किसी समस्या को हल करने के लिए प्रयत्नशील होना तत्परता कहलाता है। जैसे यदि बच्चे में गणित के प्रश्न हल करने की इच्छा है तो तत्परता के कारण वह उनको अधिक शीघ्रता से और कुशलता से करता है। (2) अभ्यास का नियम (Law of Exercise)– अभ्यास से सीखना स्थाई होता है, क्योंकि यदि हम किसी सीखे हुए कार्य का अभ्यास नहीं करते हैं, तो उसे शीघ्र ही भूल जाते हैं। अत: अभ्यास हमें कुशल बनाता है। (3) प्रभाव का निमय (Law of Effect) – थॉर्नडाइक के अनुसार हम उस कार्य को ज्यादा अच्छे से करना चाहते है जिसका परिणाम हमारे लिए हितकर होता है, जिससे हमें सुख व सन्तोष मिलता है।