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Q: ‘उर्वशी’ किसकी रचना है?
  • A. रामवृक्ष बेनीपुरी
  • B. रामधारी सिंह दिनकर
  • C. सियाराम शरण
  • D. अज्ञेय
Correct Answer: Option B - ‘उर्वशी’ रामधारी सिंह दिनकर की रचना है। इसके लिए दिनकर जी को 1972 ई. में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इनकी अन्य रचनाएँ– रश्मिरथी, हुंकार, कुरूक्षेत्र, परशुराम की प्रतीक्षा, रसवंती, रेणुका आदि हैं। अज्ञेय जी को ‘कितनी नावो में कितनी बार’ के लिए 1978 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। अज्ञेय जी की अन्य रचनायें हैं– भग्नदूत, चिन्ता, सुनहरे शैवाल, इत्यलम, कितनी नावों में कितनी बार, पूर्वा, सागरमुद्रा आदि। रामवृक्ष बेनीपुरी जी की रचनाएँ– माटी की मूरतें, आम्रपाली, गेहूँ और गुलाब, मील के पत्थर, पतितों के देश में आदि हैं। सियारामशरण गुप्त की रचनाएँ–मौर्यविजय, अनाथ, दूर्वादल, विषाद, आर्द्रा, आत्मोत्सर्ग, पाथेय, मृण्मयी, बापू आदि हैं।
B. ‘उर्वशी’ रामधारी सिंह दिनकर की रचना है। इसके लिए दिनकर जी को 1972 ई. में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इनकी अन्य रचनाएँ– रश्मिरथी, हुंकार, कुरूक्षेत्र, परशुराम की प्रतीक्षा, रसवंती, रेणुका आदि हैं। अज्ञेय जी को ‘कितनी नावो में कितनी बार’ के लिए 1978 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। अज्ञेय जी की अन्य रचनायें हैं– भग्नदूत, चिन्ता, सुनहरे शैवाल, इत्यलम, कितनी नावों में कितनी बार, पूर्वा, सागरमुद्रा आदि। रामवृक्ष बेनीपुरी जी की रचनाएँ– माटी की मूरतें, आम्रपाली, गेहूँ और गुलाब, मील के पत्थर, पतितों के देश में आदि हैं। सियारामशरण गुप्त की रचनाएँ–मौर्यविजय, अनाथ, दूर्वादल, विषाद, आर्द्रा, आत्मोत्सर्ग, पाथेय, मृण्मयी, बापू आदि हैं।

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‘उर्वशी’ रामधारी सिंह दिनकर की रचना है। इसके लिए दिनकर जी को 1972 ई. में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इनकी अन्य रचनाएँ– रश्मिरथी, हुंकार, कुरूक्षेत्र, परशुराम की प्रतीक्षा, रसवंती, रेणुका आदि हैं। अज्ञेय जी को ‘कितनी नावो में कितनी बार’ के लिए 1978 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। अज्ञेय जी की अन्य रचनायें हैं– भग्नदूत, चिन्ता, सुनहरे शैवाल, इत्यलम, कितनी नावों में कितनी बार, पूर्वा, सागरमुद्रा आदि। रामवृक्ष बेनीपुरी जी की रचनाएँ– माटी की मूरतें, आम्रपाली, गेहूँ और गुलाब, मील के पत्थर, पतितों के देश में आदि हैं। सियारामशरण गुप्त की रचनाएँ–मौर्यविजय, अनाथ, दूर्वादल, विषाद, आर्द्रा, आत्मोत्सर्ग, पाथेय, मृण्मयी, बापू आदि हैं।