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Q: The fine-grained soils in the Indian standard classification system are subdivided into: भारतीय मानक वर्गीकरण प्रणाली में महीन कणों वाली मृदा को उपविभाजित किया गया है -
  • A. low, medium and high compressiblity of soils/मृदा की निम्न, मध्यम और उच्च संपीड्यता
  • B. medium and high compressibility of soils मृदा की मध्यम और उच्च संपीड्यता
  • C. low and high compressibility of soil मृदा की निम्न और उच्च संपीड्यता
  • D. low and medium compressiblity of soils मृदा निम्न और मध्यम संपीड्यता
Correct Answer: Option A - भारतीय मानक वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार महीन कणीय मृदाओं को पुन: स्वैच्छिक रूप से निर्धारित द्रव सीमा के आधार पर निम्न समूहों में बाँटा जाता है - 1. निम्न सम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 35%से कम होती है। 2. मध्यम सम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 35%से 50% के मध्य होती है। 3. उच्च संम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 50% से अधिक होती है।
A. भारतीय मानक वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार महीन कणीय मृदाओं को पुन: स्वैच्छिक रूप से निर्धारित द्रव सीमा के आधार पर निम्न समूहों में बाँटा जाता है - 1. निम्न सम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 35%से कम होती है। 2. मध्यम सम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 35%से 50% के मध्य होती है। 3. उच्च संम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 50% से अधिक होती है।

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भारतीय मानक वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार महीन कणीय मृदाओं को पुन: स्वैच्छिक रूप से निर्धारित द्रव सीमा के आधार पर निम्न समूहों में बाँटा जाता है - 1. निम्न सम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 35%से कम होती है। 2. मध्यम सम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 35%से 50% के मध्य होती है। 3. उच्च संम्पीड्यता वाली सिल्ट एवं मृत्तिका - इनकी द्रव सीमा 50% से अधिक होती है।