Correct Answer:
Option C - 1398 ई. में तुगलक वंश के अन्तिम शासक नासिरुद्दीन महमूद के समय दिल्ली पर तैमूर का आक्रमण हुआ था। तैमूर ट्रान्स आक्सियाना (ईरान) के तुर्कों की बरलास नस्ल का था। उसने खैबर दर्रे को पार कर भारत पर आक्रमण किया एवं दिल्ली में 15 दिनों तक लूटपाट की। तुगलक वंश के पतन के बाद खिङ्का खाँ ने तैमूर की सहायता से सैय्यद वंश की स्थापना की। खिङ्का खाँ (1414-21 ई.) सुल्तान की उपाधि धारण न करके ‘रैयत-ए-आला’ की उपाधि से सन्तुष्ट रहा। खिङ्का खाँ के बाद क्रमश: मुबारक शाह (1421-1434 ई.), मुहम्मद शाह (1434-1445 ई.) अलाउद्दीन आलम शाह (1445-51 ई.) ने शासन किया। सैय्यद वंश के सुल्तान स्वयं को पैगम्बर मोहम्मद का वंशज मानते थे।
नोट– सैय्यद वंश का इतिहास जानने का महत्वपूर्ण स्रोत याहिया बिन अहमद सरहिन्दी की ‘तारीख-ए-मुबारकशाही’ है। सरहिन्दी को मुबारक शाह ने संरक्षण दिया था।
C. 1398 ई. में तुगलक वंश के अन्तिम शासक नासिरुद्दीन महमूद के समय दिल्ली पर तैमूर का आक्रमण हुआ था। तैमूर ट्रान्स आक्सियाना (ईरान) के तुर्कों की बरलास नस्ल का था। उसने खैबर दर्रे को पार कर भारत पर आक्रमण किया एवं दिल्ली में 15 दिनों तक लूटपाट की। तुगलक वंश के पतन के बाद खिङ्का खाँ ने तैमूर की सहायता से सैय्यद वंश की स्थापना की। खिङ्का खाँ (1414-21 ई.) सुल्तान की उपाधि धारण न करके ‘रैयत-ए-आला’ की उपाधि से सन्तुष्ट रहा। खिङ्का खाँ के बाद क्रमश: मुबारक शाह (1421-1434 ई.), मुहम्मद शाह (1434-1445 ई.) अलाउद्दीन आलम शाह (1445-51 ई.) ने शासन किया। सैय्यद वंश के सुल्तान स्वयं को पैगम्बर मोहम्मद का वंशज मानते थे।
नोट– सैय्यद वंश का इतिहास जानने का महत्वपूर्ण स्रोत याहिया बिन अहमद सरहिन्दी की ‘तारीख-ए-मुबारकशाही’ है। सरहिन्दी को मुबारक शाह ने संरक्षण दिया था।