Explanations:
चौमू देवता का मूलस्थान चम्पावत जनपद में गुमदेश स्थित चमलदेव में है किन्तु चम्पावत के अतिरिक्त पिथौरागढ़ में वड्डा के निकट चौपाता तथा अल्मोड़ा की रयूनी तथा द्वारसों पट्टियों एवं उनके निकटवर्ती इलाकों में भी इसका प्रभाव है। इनके चार मुँह होने के कारण चौमू देवता कहा जाता है। यह चारागाह में जाने वाले पशुओं का रक्षक है। इस प्रकार चौमू देवता का संबंध पशुधन से है।