Correct Answer:
Option B - कोटरण (Cavitation)–तरल के प्रवाह के दौरान यदि किसी जगह का दाब तरल के वाष्प दाब से कम या बराबर हो जाता है तो तरल में घुली हुई गैसे या तरल वाष्पित होने लगता है जिससे छोटे-छोटे बुलबुले बनते हैं और तरल के प्रवाह के साथ बहने लगते हैं जो आगे चलकर दाब बढ़ने पर बड़े बुलबुले का स्वरूप ले लेते हैं। दाब के अत्यधिक होने के कारण तरल की आघात तीव्र गति से बुलबुले पर प्रहार करती है जिसके कारण बुलबुला दृढ़ सीमा पर जाकर फूट जाता है और उस जगह पर धातु में छिद्रण (Pitting) कर देता है जिससे कि धातु का क्षरण (Errosion) हो जाता है तथा कुछ दिन बाद वही पर संक्षारण (Corrosion) शुरू हो जाता है। इस घटना को ही कोटरण (Cavitation) कहते हैं। वेग शीर्ष (Velocity head) को कम करके कोटरण तथा छिद्रण (Pitting) को रोका जा सकता है।
B. कोटरण (Cavitation)–तरल के प्रवाह के दौरान यदि किसी जगह का दाब तरल के वाष्प दाब से कम या बराबर हो जाता है तो तरल में घुली हुई गैसे या तरल वाष्पित होने लगता है जिससे छोटे-छोटे बुलबुले बनते हैं और तरल के प्रवाह के साथ बहने लगते हैं जो आगे चलकर दाब बढ़ने पर बड़े बुलबुले का स्वरूप ले लेते हैं। दाब के अत्यधिक होने के कारण तरल की आघात तीव्र गति से बुलबुले पर प्रहार करती है जिसके कारण बुलबुला दृढ़ सीमा पर जाकर फूट जाता है और उस जगह पर धातु में छिद्रण (Pitting) कर देता है जिससे कि धातु का क्षरण (Errosion) हो जाता है तथा कुछ दिन बाद वही पर संक्षारण (Corrosion) शुरू हो जाता है। इस घटना को ही कोटरण (Cavitation) कहते हैं। वेग शीर्ष (Velocity head) को कम करके कोटरण तथा छिद्रण (Pitting) को रोका जा सकता है।