Correct Answer:
Option A - बौद्ध संघ मठवासियों का एक संगठन था। बुद्ध के शिष्य आनंद व उपालि ने सारनाथ में संघ की स्थापना की। बौद्ध संघ का दरवाजा प्रत्येक जातियों के लिए खुला था तथा स्त्रियों को संघ में प्रवेश का अधिकार था। संघ की सभा के लिए न्यूनतम संख्या 20 थी, संघ के प्रस्ताव पाठ को ‘अनुसावन’ कहते थे। बौद्ध संघ में प्रविष्ट होने को ‘उपसम्पदा’ कहते हैं तथा इसमें सम्मिलित होने की न्यूनतम आयु 20 वर्ष थी। बौद्ध संघ में चोर, हत्यारों, ऋणी, राजा के सेवक, दास, रोगियों का प्रवेश वर्जित था। बौद्ध संघ के मठवासियों का कार्य संघ के लोगो को धर्म की शिक्षा देना था। संघ के नियम तथा भिक्षु-भिक्षुणियों दैनिक जीवन सम्बन्धी आचार-विचार तथा विधि निषेधों के बारे में विस्तृत विवरण बौद्ध ग्रंथ विनय पिटक से प्राप्त होता है।
A. बौद्ध संघ मठवासियों का एक संगठन था। बुद्ध के शिष्य आनंद व उपालि ने सारनाथ में संघ की स्थापना की। बौद्ध संघ का दरवाजा प्रत्येक जातियों के लिए खुला था तथा स्त्रियों को संघ में प्रवेश का अधिकार था। संघ की सभा के लिए न्यूनतम संख्या 20 थी, संघ के प्रस्ताव पाठ को ‘अनुसावन’ कहते थे। बौद्ध संघ में प्रविष्ट होने को ‘उपसम्पदा’ कहते हैं तथा इसमें सम्मिलित होने की न्यूनतम आयु 20 वर्ष थी। बौद्ध संघ में चोर, हत्यारों, ऋणी, राजा के सेवक, दास, रोगियों का प्रवेश वर्जित था। बौद्ध संघ के मठवासियों का कार्य संघ के लोगो को धर्म की शिक्षा देना था। संघ के नियम तथा भिक्षु-भिक्षुणियों दैनिक जीवन सम्बन्धी आचार-विचार तथा विधि निषेधों के बारे में विस्तृत विवरण बौद्ध ग्रंथ विनय पिटक से प्राप्त होता है।