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Q: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66A को किस मामले में असंवैधानिक ठहराकर निरस्त कर दिया?
  • A. इंदिरा साहनी मामला
  • B. सरला मुद्गल मामला
  • C. चम्पकम दोरईराजन मामला
  • D. श्रेया सिंघल मामला
Correct Answer: Option D - 2015 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की आपत्तिजनक धारा 66A को न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार दिये जाने के बाद भी पुलिस द्वारा इसके आधार पर नागरिकों का उत्पीड़न देखा जाता रहा है। श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि धारा 66A मनमाने ढंग से, अत्यधिक और विषमतापूर्ण रूप से अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के अधिकार पर हमला करती है और इस तरह के अधिकार तथा युक्तियुक्त प्रतिबंधों के बीच संतुलन को भी विचलित करती है।
D. 2015 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की आपत्तिजनक धारा 66A को न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार दिये जाने के बाद भी पुलिस द्वारा इसके आधार पर नागरिकों का उत्पीड़न देखा जाता रहा है। श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि धारा 66A मनमाने ढंग से, अत्यधिक और विषमतापूर्ण रूप से अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के अधिकार पर हमला करती है और इस तरह के अधिकार तथा युक्तियुक्त प्रतिबंधों के बीच संतुलन को भी विचलित करती है।

Explanations:

2015 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की आपत्तिजनक धारा 66A को न्यायालय द्वारा असंवैधानिक करार दिये जाने के बाद भी पुलिस द्वारा इसके आधार पर नागरिकों का उत्पीड़न देखा जाता रहा है। श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि धारा 66A मनमाने ढंग से, अत्यधिक और विषमतापूर्ण रूप से अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के अधिकार पर हमला करती है और इस तरह के अधिकार तथा युक्तियुक्त प्रतिबंधों के बीच संतुलन को भी विचलित करती है।