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Q: ___________एक अंधे कवि थे, जिन्होंने अपने ‘सूरसागर’ नामक संग्रह में कृष्ण की महिमा का गायन किया था
  • A. सूरदास
  • B. चैतन्य
  • C. विद्यापति
  • D. वीरदास
Correct Answer: Option A - तुलसी दास की भाँति ही हिन्दी भाषा के एक अत्यंत प्रसिद्ध संत सूरदास थे, जिनके जन्म व मृत्यु के संबंध में काफी विवाद है, परन्तु इनका समय संभवत: 16वीं व 17वीं शताब्दी के मध्य हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि वे जन्मांध थे, परन्तु उनमें सगुण बताने की अद्भुत क्षमता थी। संगीत में भी वे आरम्भ से ही प्रवीण थे। सूरदास द्वारा ब्रजभाषा में लिखित कृष्ण भक्ति के पदों के इनके तीन ग्रन्थों में संकलित किया गया है – सूर सारावली, सूर सागर तथा साहित्य लहरी। इसमें से सबसे प्रसिद्व सूर सागर है।
A. तुलसी दास की भाँति ही हिन्दी भाषा के एक अत्यंत प्रसिद्ध संत सूरदास थे, जिनके जन्म व मृत्यु के संबंध में काफी विवाद है, परन्तु इनका समय संभवत: 16वीं व 17वीं शताब्दी के मध्य हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि वे जन्मांध थे, परन्तु उनमें सगुण बताने की अद्भुत क्षमता थी। संगीत में भी वे आरम्भ से ही प्रवीण थे। सूरदास द्वारा ब्रजभाषा में लिखित कृष्ण भक्ति के पदों के इनके तीन ग्रन्थों में संकलित किया गया है – सूर सारावली, सूर सागर तथा साहित्य लहरी। इसमें से सबसे प्रसिद्व सूर सागर है।

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तुलसी दास की भाँति ही हिन्दी भाषा के एक अत्यंत प्रसिद्ध संत सूरदास थे, जिनके जन्म व मृत्यु के संबंध में काफी विवाद है, परन्तु इनका समय संभवत: 16वीं व 17वीं शताब्दी के मध्य हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि वे जन्मांध थे, परन्तु उनमें सगुण बताने की अद्भुत क्षमता थी। संगीत में भी वे आरम्भ से ही प्रवीण थे। सूरदास द्वारा ब्रजभाषा में लिखित कृष्ण भक्ति के पदों के इनके तीन ग्रन्थों में संकलित किया गया है – सूर सारावली, सूर सागर तथा साहित्य लहरी। इसमें से सबसे प्रसिद्व सूर सागर है।