Correct Answer:
Option C - लेखांकन की वह अवधारणा जिसके आधार लाभ और हानि खाता तैयार किया जाता है, मिलान अवधारणा (Matching) कहलाती है। इसको आगम-व्यय मिलान अवधारणा के नाम से भी जानते हैं। व्यावसाय के शुद्ध लाभों के निर्धारण के लिए यह अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धान्त के अनुसार, शुद्ध लाभ के निर्धारण के लिए जिस अवधि में आगम की प्राप्ति हुई है, उस अवधि के व्ययों की भी गणना करनी होती है। दूसरे शब्दों में लागत के आगम से मिलान के लिए पहले आगम निर्धारित करने चाहिए और फिर आगम की प्राप्ति हेतु जो खर्च किए गए है, उसका निर्धारण होना चाहिए।
C. लेखांकन की वह अवधारणा जिसके आधार लाभ और हानि खाता तैयार किया जाता है, मिलान अवधारणा (Matching) कहलाती है। इसको आगम-व्यय मिलान अवधारणा के नाम से भी जानते हैं। व्यावसाय के शुद्ध लाभों के निर्धारण के लिए यह अवधारणा बहुत महत्वपूर्ण है। इस सिद्धान्त के अनुसार, शुद्ध लाभ के निर्धारण के लिए जिस अवधि में आगम की प्राप्ति हुई है, उस अवधि के व्ययों की भी गणना करनी होती है। दूसरे शब्दों में लागत के आगम से मिलान के लिए पहले आगम निर्धारित करने चाहिए और फिर आगम की प्राप्ति हेतु जो खर्च किए गए है, उसका निर्धारण होना चाहिए।