Correct Answer:
Option A - ‘देवर्षि’ का संधि-विच्छेद ‘देव + ऋषि’ है। यहाँ गुण स्वर संधि है। जब भी अ या आ के बाद ऋ आए तो दोनों के मिलने से ‘अर्’ बन जाता है।
गुण संधि–यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’ ‘उ’ या ‘ऊ’ और ‘ऋ’ आये तो दानों मिलकर क्रमश: ‘ए’, ‘ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं। जैसे– महा + ऋषि = महर्षि
गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि
A. ‘देवर्षि’ का संधि-विच्छेद ‘देव + ऋषि’ है। यहाँ गुण स्वर संधि है। जब भी अ या आ के बाद ऋ आए तो दोनों के मिलने से ‘अर्’ बन जाता है।
गुण संधि–यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’ ‘उ’ या ‘ऊ’ और ‘ऋ’ आये तो दानों मिलकर क्रमश: ‘ए’, ‘ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं। जैसे– महा + ऋषि = महर्षि
गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि