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Q: देवर्षि’ का सही संधि-विच्छेद कौन-सा है?
  • A. देव + ऋषि
  • B. देव + अर्षि
  • C. दे + वर्षी
  • D. देवर + ऋषि
Correct Answer: Option A - ‘देवर्षि’ का संधि-विच्छेद ‘देव + ऋषि’ है। यहाँ गुण स्वर संधि है। जब भी अ या आ के बाद ऋ आए तो दोनों के मिलने से ‘अर्’ बन जाता है। गुण संधि–यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’ ‘उ’ या ‘ऊ’ और ‘ऋ’ आये तो दानों मिलकर क्रमश: ‘ए’, ‘ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं। जैसे– महा + ऋषि = महर्षि गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि
A. ‘देवर्षि’ का संधि-विच्छेद ‘देव + ऋषि’ है। यहाँ गुण स्वर संधि है। जब भी अ या आ के बाद ऋ आए तो दोनों के मिलने से ‘अर्’ बन जाता है। गुण संधि–यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’ ‘उ’ या ‘ऊ’ और ‘ऋ’ आये तो दानों मिलकर क्रमश: ‘ए’, ‘ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं। जैसे– महा + ऋषि = महर्षि गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि

Explanations:

‘देवर्षि’ का संधि-विच्छेद ‘देव + ऋषि’ है। यहाँ गुण स्वर संधि है। जब भी अ या आ के बाद ऋ आए तो दोनों के मिलने से ‘अर्’ बन जाता है। गुण संधि–यदि ‘अ’ या ‘आ’ के बाद ‘इ’ या ‘ई’ ‘उ’ या ‘ऊ’ और ‘ऋ’ आये तो दानों मिलकर क्रमश: ‘ए’, ‘ओ’ और ‘अर्’ हो जाते हैं। जैसे– महा + ऋषि = महर्षि गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि