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Q: द्रुतविलम्बित छन्द का लक्षण है कि इसके प्रत्येक चरण में होते हैं
  • A. दो तगण, एक जगण तथा दो गुरु के क्रम में 11 वर्ण
  • B. एक जगण, एक तगण, एक जगण तथा एक रगण के क्रम में 12 वर्ण
  • C. एक तगण, एक भगण, दो जगण तथा दो गुरु के क्रम में 14 वर्ण
  • D. एक नगण, दो भगण तथा एक रगण के क्रम में 12 वर्ण
Correct Answer: Option D - एक नगण, दो भगण तथा एक रगण के क्रम में 12 वर्ण दु्रतविलम्बित छंद का लक्षण है। वर्णों या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्लाद पैदा हो, तो इसे ही छंद कहते हैं। छंद का सर्वप्रथम उल्लेख ‘ऋग्वेद’ में मिलता है। छंद का दूसरा नाम ‘पिंगल’ भी है क्योंकि छंदशास्त्र के आदि प्रणेता पिंगल नामक ऋषि थे। मुख्यत: छंद के दो भेद हैं- मात्रिक छंद तथा वर्णिक छंद। द्रुुतविलम्बित एक वर्णिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 12 वर्ण होते हैं।
D. एक नगण, दो भगण तथा एक रगण के क्रम में 12 वर्ण दु्रतविलम्बित छंद का लक्षण है। वर्णों या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्लाद पैदा हो, तो इसे ही छंद कहते हैं। छंद का सर्वप्रथम उल्लेख ‘ऋग्वेद’ में मिलता है। छंद का दूसरा नाम ‘पिंगल’ भी है क्योंकि छंदशास्त्र के आदि प्रणेता पिंगल नामक ऋषि थे। मुख्यत: छंद के दो भेद हैं- मात्रिक छंद तथा वर्णिक छंद। द्रुुतविलम्बित एक वर्णिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 12 वर्ण होते हैं।

Explanations:

एक नगण, दो भगण तथा एक रगण के क्रम में 12 वर्ण दु्रतविलम्बित छंद का लक्षण है। वर्णों या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्लाद पैदा हो, तो इसे ही छंद कहते हैं। छंद का सर्वप्रथम उल्लेख ‘ऋग्वेद’ में मिलता है। छंद का दूसरा नाम ‘पिंगल’ भी है क्योंकि छंदशास्त्र के आदि प्रणेता पिंगल नामक ऋषि थे। मुख्यत: छंद के दो भेद हैं- मात्रिक छंद तथा वर्णिक छंद। द्रुुतविलम्बित एक वर्णिक छंद है जिसके प्रत्येक चरण में 12 वर्ण होते हैं।