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Q: ‘‘थर्राती है वसुधा सारी, है आसमान तड़तड़ा रहा। अरि दल पर कूद पड़ूँ उड़कर है रोम-रोम फड़फड़ा रहा।।’’ उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा रस है ?
  • A. वीर रस
  • B. भायानक रस
  • C. विभत्स रस
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option A - उपर्युक्त पंक्तियों में वीर रस है। ⇒ जिस भावों से विक्रान्त या वीरता प्रकट हो, उसे वीर रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘उत्साह’ है। इसका उद्दीपन मारू बाजों का बजना, क्रंदन, शंखनाद आदि है। ⇒ जिस रस के आस्वादन में इन्द्रियक्षोभ या भय उत्पन्न हो, उसे भयानक रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘भय’ है। इसका उद्दीपन अंधकार, अवस्कंदन तथा भूत, प्रेत आदि की चेष्टाएँ है। ⇒ वीभत्स रस-जिस रस के आस्वादन से घृणा के भाव प्रकट हो, उसे वीभत्स रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘जुगुप्सा है।
A. उपर्युक्त पंक्तियों में वीर रस है। ⇒ जिस भावों से विक्रान्त या वीरता प्रकट हो, उसे वीर रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘उत्साह’ है। इसका उद्दीपन मारू बाजों का बजना, क्रंदन, शंखनाद आदि है। ⇒ जिस रस के आस्वादन में इन्द्रियक्षोभ या भय उत्पन्न हो, उसे भयानक रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘भय’ है। इसका उद्दीपन अंधकार, अवस्कंदन तथा भूत, प्रेत आदि की चेष्टाएँ है। ⇒ वीभत्स रस-जिस रस के आस्वादन से घृणा के भाव प्रकट हो, उसे वीभत्स रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘जुगुप्सा है।

Explanations:

उपर्युक्त पंक्तियों में वीर रस है। ⇒ जिस भावों से विक्रान्त या वीरता प्रकट हो, उसे वीर रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘उत्साह’ है। इसका उद्दीपन मारू बाजों का बजना, क्रंदन, शंखनाद आदि है। ⇒ जिस रस के आस्वादन में इन्द्रियक्षोभ या भय उत्पन्न हो, उसे भयानक रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘भय’ है। इसका उद्दीपन अंधकार, अवस्कंदन तथा भूत, प्रेत आदि की चेष्टाएँ है। ⇒ वीभत्स रस-जिस रस के आस्वादन से घृणा के भाव प्रकट हो, उसे वीभत्स रस कहते है। इसका स्थायी भाव ‘जुगुप्सा है।