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Q: ‘दुर्गा’ एकांकी नाटक के रचनाकार हैं–
  • A. जगदीशचन्द्र माथुर
  • B. उपेन्द्रनाथ अश्क
  • C. उदयशंकर भट्ट
  • D. सेठ गोविन्ददास
Correct Answer: Option C - ‘दुर्गा’ एकांकी नाटक के रचनाकार उदयशंकर भट्ट हैं। उदयशंकर भट्ट के अन्य एकांकी हैं- एक ही कब्र में, दस हजार, नेता, उन्नीस सौ पैंतीस, वर निर्वाचन, सेठ लाभचन्द, स्त्री का हृदय, बड़े आदमी की मृत्यु, नये मेहमान, पर्दे के पीछे, मुंशी अनोखे लाल, विष की पुडि़या, धूम शिखा। जगदीश चन्द्र माथुर के एकांकी - मेरी बाँसुरी, भोर का तारा, कलिंग विजय, रीढ़ की हड्डी, मकड़ी का जाला, खण्डहर, खिड़की राह, घोंसले, कबूतखाना, ओ मेरे सपने, शारदीय। उपेन्द्रनाथ अश्क के एकांकी– सामाजिक व्यंग्य–लक्ष्मी का स्वागत, पापी, मोहब्बत, जोंक, स्वर्ग की झलक। प्रतीकात्मक एकांकी– चरवाहे, देवताओं की छाया में, खिड़की, अंधी गली। प्रहसन- पर्दा उठाओ, पर्दा गिराओ, कइसा साब कइसी आया। सेठ गोविन्द दास- स्पर्धा, मानव मन, मैत्री, वह मरा क्यों, हंगर स्ट्राइक, बुद्ध की एक शिष्या, सप्त रश्मि, एकादशी, पंचभूत, चतुष्पथ, आपबीती-जगबीती।
C. ‘दुर्गा’ एकांकी नाटक के रचनाकार उदयशंकर भट्ट हैं। उदयशंकर भट्ट के अन्य एकांकी हैं- एक ही कब्र में, दस हजार, नेता, उन्नीस सौ पैंतीस, वर निर्वाचन, सेठ लाभचन्द, स्त्री का हृदय, बड़े आदमी की मृत्यु, नये मेहमान, पर्दे के पीछे, मुंशी अनोखे लाल, विष की पुडि़या, धूम शिखा। जगदीश चन्द्र माथुर के एकांकी - मेरी बाँसुरी, भोर का तारा, कलिंग विजय, रीढ़ की हड्डी, मकड़ी का जाला, खण्डहर, खिड़की राह, घोंसले, कबूतखाना, ओ मेरे सपने, शारदीय। उपेन्द्रनाथ अश्क के एकांकी– सामाजिक व्यंग्य–लक्ष्मी का स्वागत, पापी, मोहब्बत, जोंक, स्वर्ग की झलक। प्रतीकात्मक एकांकी– चरवाहे, देवताओं की छाया में, खिड़की, अंधी गली। प्रहसन- पर्दा उठाओ, पर्दा गिराओ, कइसा साब कइसी आया। सेठ गोविन्द दास- स्पर्धा, मानव मन, मैत्री, वह मरा क्यों, हंगर स्ट्राइक, बुद्ध की एक शिष्या, सप्त रश्मि, एकादशी, पंचभूत, चतुष्पथ, आपबीती-जगबीती।

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‘दुर्गा’ एकांकी नाटक के रचनाकार उदयशंकर भट्ट हैं। उदयशंकर भट्ट के अन्य एकांकी हैं- एक ही कब्र में, दस हजार, नेता, उन्नीस सौ पैंतीस, वर निर्वाचन, सेठ लाभचन्द, स्त्री का हृदय, बड़े आदमी की मृत्यु, नये मेहमान, पर्दे के पीछे, मुंशी अनोखे लाल, विष की पुडि़या, धूम शिखा। जगदीश चन्द्र माथुर के एकांकी - मेरी बाँसुरी, भोर का तारा, कलिंग विजय, रीढ़ की हड्डी, मकड़ी का जाला, खण्डहर, खिड़की राह, घोंसले, कबूतखाना, ओ मेरे सपने, शारदीय। उपेन्द्रनाथ अश्क के एकांकी– सामाजिक व्यंग्य–लक्ष्मी का स्वागत, पापी, मोहब्बत, जोंक, स्वर्ग की झलक। प्रतीकात्मक एकांकी– चरवाहे, देवताओं की छाया में, खिड़की, अंधी गली। प्रहसन- पर्दा उठाओ, पर्दा गिराओ, कइसा साब कइसी आया। सेठ गोविन्द दास- स्पर्धा, मानव मन, मैत्री, वह मरा क्यों, हंगर स्ट्राइक, बुद्ध की एक शिष्या, सप्त रश्मि, एकादशी, पंचभूत, चतुष्पथ, आपबीती-जगबीती।