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Q: भारत में छोटे और सीमांत कृषकों द्वारा क्या अपनाया जाना सरल नहीं है?
  • A. शून्य भू परिष्करण
  • B. जैविक कृषि
  • C. परिशुद्धता कृषि
  • D. एकीकृत कृषि
Correct Answer: Option C - मानव की बदलती कृषिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वातावरण की गुणवत्ता बनाये रखने अथवा अच्छा करने के उद्देश्य से स्थानीय साधनों का समाकलित प्रबन्ध के समस्त प्रयास, जिससे प्राकृतिक साधनों की उपयोगिता कम न हो परिशुद्धता कृषि कहलाती है। इसे सुसंगत कृषि भी कहते हैं। भारतीय किसान (छोटे और सीमांत) जागरूकता के अभाव, निरक्षरता पूँजी की कमी, पिछड़ी तकनीक आदि के कारण परिशुद्धता कृषि कर पाने में असमर्थ है।
C. मानव की बदलती कृषिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वातावरण की गुणवत्ता बनाये रखने अथवा अच्छा करने के उद्देश्य से स्थानीय साधनों का समाकलित प्रबन्ध के समस्त प्रयास, जिससे प्राकृतिक साधनों की उपयोगिता कम न हो परिशुद्धता कृषि कहलाती है। इसे सुसंगत कृषि भी कहते हैं। भारतीय किसान (छोटे और सीमांत) जागरूकता के अभाव, निरक्षरता पूँजी की कमी, पिछड़ी तकनीक आदि के कारण परिशुद्धता कृषि कर पाने में असमर्थ है।

Explanations:

मानव की बदलती कृषिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ वातावरण की गुणवत्ता बनाये रखने अथवा अच्छा करने के उद्देश्य से स्थानीय साधनों का समाकलित प्रबन्ध के समस्त प्रयास, जिससे प्राकृतिक साधनों की उपयोगिता कम न हो परिशुद्धता कृषि कहलाती है। इसे सुसंगत कृषि भी कहते हैं। भारतीय किसान (छोटे और सीमांत) जागरूकता के अभाव, निरक्षरता पूँजी की कमी, पिछड़ी तकनीक आदि के कारण परिशुद्धता कृषि कर पाने में असमर्थ है।