Correct Answer:
Option D - रासायनिक यौगिक डाइक्लोरो-डाइफेनिल ट्राइक्लोरो एथेन (DDT) लकड़ी पर कीड़े-मकोड़े की रोकथाम के लिए लगाया जाता है।
■ डीडीटी का विकास 1940के दशक में आधुनिक सिंथेटिक कीटनाशकों के रूप में किया गया था।
■ डीडीटी का प्रयोग सैन्य तथा नागरिक आबादी के बीच मलेरिया, टाइफस और अन्य कीट जनित रोगों से निपटने के लिए प्रभावी रूप से किया जाता है।
गीला गलन (Wet Rot)– यह लकड़ी का रासायनिक गलन है। इस रोग से प्रकाष्ठ के रेशे गलकर एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और भूरे पाउडर के रूप में बदल जाते हैं।
■ यह दोष प्रकाष्ठ को बार-बार शुष्क तथा गीली स्थिति में डाले रखने से होता है।
■ प्रकाष्ठ को भली प्रकार से संशोषित करके, इसके ऊपर परिरक्षक जैसे पेंट, टार आदि का प्रलेप करके प्रकाष्ठ में इस दोष को रोका जा सकता है।
फॉक्सीनैस (Foxiness)– जीवित वृक्ष में जब इसके किसी भाग में किसी अवरोध के कारण रस (Sap) पहुँचना बन्द हो जाता है तो वृक्ष की उस भाग की काष्ठ पीली पड़ने लगती है। इस दोष को फॉक्सीनैस कहते हैं।
■ यह लम्बे समय तक भण्डारण की हुई लकड़ी का उचित वातन नहीं होता है, तब भी यह दोष प्रकट होने लगता है।
■ फॉक्सीनैस के कारण लकड़ी की सामर्थ्य कम हो जाती है।
D. रासायनिक यौगिक डाइक्लोरो-डाइफेनिल ट्राइक्लोरो एथेन (DDT) लकड़ी पर कीड़े-मकोड़े की रोकथाम के लिए लगाया जाता है।
■ डीडीटी का विकास 1940के दशक में आधुनिक सिंथेटिक कीटनाशकों के रूप में किया गया था।
■ डीडीटी का प्रयोग सैन्य तथा नागरिक आबादी के बीच मलेरिया, टाइफस और अन्य कीट जनित रोगों से निपटने के लिए प्रभावी रूप से किया जाता है।
गीला गलन (Wet Rot)– यह लकड़ी का रासायनिक गलन है। इस रोग से प्रकाष्ठ के रेशे गलकर एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और भूरे पाउडर के रूप में बदल जाते हैं।
■ यह दोष प्रकाष्ठ को बार-बार शुष्क तथा गीली स्थिति में डाले रखने से होता है।
■ प्रकाष्ठ को भली प्रकार से संशोषित करके, इसके ऊपर परिरक्षक जैसे पेंट, टार आदि का प्रलेप करके प्रकाष्ठ में इस दोष को रोका जा सकता है।
फॉक्सीनैस (Foxiness)– जीवित वृक्ष में जब इसके किसी भाग में किसी अवरोध के कारण रस (Sap) पहुँचना बन्द हो जाता है तो वृक्ष की उस भाग की काष्ठ पीली पड़ने लगती है। इस दोष को फॉक्सीनैस कहते हैं।
■ यह लम्बे समय तक भण्डारण की हुई लकड़ी का उचित वातन नहीं होता है, तब भी यह दोष प्रकट होने लगता है।
■ फॉक्सीनैस के कारण लकड़ी की सामर्थ्य कम हो जाती है।