Correct Answer:
Option D - खड़ी बोली गद्य का प्रारम्भिक रूप दक्षिण साहित्य में मिलता है। दक्षिण के साहित्यकारों ने अपनी भाषा को हिन्दी, ‘हिन्दवी’, ‘दक्खिनी’, देहलवी तथा जबान हिन्दुस्तान आदि कई नामों से पुकारा, दक्खिनी हिन्दी के प्रथम गद्य लेखक ‘ख्वाजा बन्दा नेवाज गेसूदराज’ को माना जाता है। इनकी प्रसिद्ध रचना ‘मेराजुल-आशकीन’ दक्खिनी गद्य की प्रथम पुस्तक मानी जाती है।
D. खड़ी बोली गद्य का प्रारम्भिक रूप दक्षिण साहित्य में मिलता है। दक्षिण के साहित्यकारों ने अपनी भाषा को हिन्दी, ‘हिन्दवी’, ‘दक्खिनी’, देहलवी तथा जबान हिन्दुस्तान आदि कई नामों से पुकारा, दक्खिनी हिन्दी के प्रथम गद्य लेखक ‘ख्वाजा बन्दा नेवाज गेसूदराज’ को माना जाता है। इनकी प्रसिद्ध रचना ‘मेराजुल-आशकीन’ दक्खिनी गद्य की प्रथम पुस्तक मानी जाती है।