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Q: हिमालय पर्वत के चित्रों के लिए कौन प्रसिद्ध है?
  • A. राम कुमार
  • B. निकोलस रोरिक
  • C. जे. स्वामिनाथन
  • D. तैयब मेहता
Correct Answer: Option B - • निकोलस रोरिक का जन्म-1874 ई. रूस में हुआ था। निकोलस रोरिक 1924 ई. में भारत आये उरूस्वती नामक स्थान पर निजी आश्रम स्थापित किया। • रोरिक को हिमालय की कुल्लू घाटी ने बहुत प्रभावित किया, हिमालय की घाटियों के अन्तदर्शन ने आपकी संवेदनाओं व सूक्ष्म सौन्दर्य चेतना को जागृत कर एक नवीन शक्ति प्रदान की। • 1928 ई. से रोरिक भारत में स्थायी रूप से बस गये, इस अवधि में रोरिक ने हिमालय के असंख्य चित्र बनाये-अरूणोदय, सूर्यास्त, कोहरा, तेज धूप, चाँदनी रात्रि में हिमालय की विभिन्न छवियाँ आदि। • रोरिक की कला भारत के सांस्कृतिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गयी। • प्रकृति के परिवर्तित रूप एवं आलोड़न को ही रोरिक ने आध्यात्मिक पुट देकर अपने सृजन की आधार भूमि बनाया।
B. • निकोलस रोरिक का जन्म-1874 ई. रूस में हुआ था। निकोलस रोरिक 1924 ई. में भारत आये उरूस्वती नामक स्थान पर निजी आश्रम स्थापित किया। • रोरिक को हिमालय की कुल्लू घाटी ने बहुत प्रभावित किया, हिमालय की घाटियों के अन्तदर्शन ने आपकी संवेदनाओं व सूक्ष्म सौन्दर्य चेतना को जागृत कर एक नवीन शक्ति प्रदान की। • 1928 ई. से रोरिक भारत में स्थायी रूप से बस गये, इस अवधि में रोरिक ने हिमालय के असंख्य चित्र बनाये-अरूणोदय, सूर्यास्त, कोहरा, तेज धूप, चाँदनी रात्रि में हिमालय की विभिन्न छवियाँ आदि। • रोरिक की कला भारत के सांस्कृतिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गयी। • प्रकृति के परिवर्तित रूप एवं आलोड़न को ही रोरिक ने आध्यात्मिक पुट देकर अपने सृजन की आधार भूमि बनाया।

Explanations:

• निकोलस रोरिक का जन्म-1874 ई. रूस में हुआ था। निकोलस रोरिक 1924 ई. में भारत आये उरूस्वती नामक स्थान पर निजी आश्रम स्थापित किया। • रोरिक को हिमालय की कुल्लू घाटी ने बहुत प्रभावित किया, हिमालय की घाटियों के अन्तदर्शन ने आपकी संवेदनाओं व सूक्ष्म सौन्दर्य चेतना को जागृत कर एक नवीन शक्ति प्रदान की। • 1928 ई. से रोरिक भारत में स्थायी रूप से बस गये, इस अवधि में रोरिक ने हिमालय के असंख्य चित्र बनाये-अरूणोदय, सूर्यास्त, कोहरा, तेज धूप, चाँदनी रात्रि में हिमालय की विभिन्न छवियाँ आदि। • रोरिक की कला भारत के सांस्कृतिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गयी। • प्रकृति के परिवर्तित रूप एवं आलोड़न को ही रोरिक ने आध्यात्मिक पुट देकर अपने सृजन की आधार भूमि बनाया।