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Q: Temperate Cyclones occur between which latitudes? शीतोष्ण चक्रवात किन अक्षांशों के मध्य उत्पन्न होते हैं?
  • A. 35⁰ to 65⁰ North and South 35º से 65º उत्तर व दक्षिण
  • B. 40º to 70º North and South 40º से 70º उत्तर व दक्षिण
  • C. 30º to 60º North and South 30º से 60º उत्तर व दक्षिण
  • D. 60º to 75º North and South 60º से 75º उत्तर व दक्षिण
Correct Answer: Option A - शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का निर्माण दो विपरीत स्वभाव वाली ठंडी तथा उष्णाद्र्र हवाओं के मिलने के कारण होता है। यह चक्रवात 35º से 65º अक्षांशों के बीच दोनों गोलाद्र्धों में उत्पन्न होते है। जहाँ पर पछुआ हवाओं के प्रभाव से ये पश्चिम से पूर्व दिशा में चलते रहते हैं, इसके केन्द्र में कम वायुदाब एवं बाहर की ओर अधिक वायुदाब होता है। प्राय: इनका आकार गोलाकार तथा अण्डाकार होता है जिस कारण इन्हें लो, गर्त या ट्रफ कहते हैं। शीतोष्ण चक्रवातों को लहर चक्रवात या विक्षोभ भी कहते हैं। नोट :– ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त या लहर सिद्धांत शीतोेष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की उत्पत्ति का सिद्धांत है जिसका प्रतिपादन सन् 1918 ई. में वी० वर्कनीज तथा जे० वर्कनीज ने किया था। प्रतिचक्रवात शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग एफ. गैफन महोदय ने सन् 1861 ई. में किया था।
A. शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का निर्माण दो विपरीत स्वभाव वाली ठंडी तथा उष्णाद्र्र हवाओं के मिलने के कारण होता है। यह चक्रवात 35º से 65º अक्षांशों के बीच दोनों गोलाद्र्धों में उत्पन्न होते है। जहाँ पर पछुआ हवाओं के प्रभाव से ये पश्चिम से पूर्व दिशा में चलते रहते हैं, इसके केन्द्र में कम वायुदाब एवं बाहर की ओर अधिक वायुदाब होता है। प्राय: इनका आकार गोलाकार तथा अण्डाकार होता है जिस कारण इन्हें लो, गर्त या ट्रफ कहते हैं। शीतोष्ण चक्रवातों को लहर चक्रवात या विक्षोभ भी कहते हैं। नोट :– ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त या लहर सिद्धांत शीतोेष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की उत्पत्ति का सिद्धांत है जिसका प्रतिपादन सन् 1918 ई. में वी० वर्कनीज तथा जे० वर्कनीज ने किया था। प्रतिचक्रवात शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग एफ. गैफन महोदय ने सन् 1861 ई. में किया था।

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शीतोष्ण कटिबन्धीय चक्रवात का निर्माण दो विपरीत स्वभाव वाली ठंडी तथा उष्णाद्र्र हवाओं के मिलने के कारण होता है। यह चक्रवात 35º से 65º अक्षांशों के बीच दोनों गोलाद्र्धों में उत्पन्न होते है। जहाँ पर पछुआ हवाओं के प्रभाव से ये पश्चिम से पूर्व दिशा में चलते रहते हैं, इसके केन्द्र में कम वायुदाब एवं बाहर की ओर अधिक वायुदाब होता है। प्राय: इनका आकार गोलाकार तथा अण्डाकार होता है जिस कारण इन्हें लो, गर्त या ट्रफ कहते हैं। शीतोष्ण चक्रवातों को लहर चक्रवात या विक्षोभ भी कहते हैं। नोट :– ध्रुवीय वाताग्र सिद्धान्त या लहर सिद्धांत शीतोेष्ण कटिबन्धीय चक्रवात की उत्पत्ति का सिद्धांत है जिसका प्रतिपादन सन् 1918 ई. में वी० वर्कनीज तथा जे० वर्कनीज ने किया था। प्रतिचक्रवात शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग एफ. गैफन महोदय ने सन् 1861 ई. में किया था।