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Q: तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये। झुके कूल सों जल परसन हित मनहुं सुहाये। इस कविता की दूसरी पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
  • A. अनुप्रास
  • B. रूपक
  • C. यमक
  • D. उत्प्रेक्षा
Correct Answer: Option D - तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये। झूके कूल सों जल परसन हित मनहुं सुहाये।। उपर्युक्त पंक्ति में ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार है। जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। यदि पंक्ति में-मनु, जनु, जानों, मानहु, मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि आता है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
D. तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये। झूके कूल सों जल परसन हित मनहुं सुहाये।। उपर्युक्त पंक्ति में ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार है। जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। यदि पंक्ति में-मनु, जनु, जानों, मानहु, मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि आता है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

Explanations:

तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाये। झूके कूल सों जल परसन हित मनहुं सुहाये।। उपर्युक्त पंक्ति में ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार है। जहाँ उपमेय में उपमान की संभावना या कल्पना की जाए, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है। यदि पंक्ति में-मनु, जनु, जानों, मानहु, मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि आता है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।