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Q: ‘तपोधनं वेत्सि न माम् उपस्थितम्’ इति कस्य परिचयोऽस्ति?
  • A. हनूमत:
  • B. भरतस्य
  • C. शर्विलकस्य
  • D. दुर्वासस:
Correct Answer: Option D - ‘तपोधनं वेत्सि न माम् उपस्थितम्’ इस वाक्य से दुर्वासा ऋषि का परिचय मिलता है। यह पद्य शाकुन्तलम् के चतुर्थ अङ्क का है जब शकुन्तला राजा दुष्यन्त की चिन्ता में मग्न थी उसी समय दुर्वासा आ जाते हैं और शकुन्तला उनका आगमन नहीं जान पाती तब दुर्वासा ऋषि कहते हैं– ‘‘विचिन्त्यन्ती यमनन्यमानसा तपोधनं वेत्सि न मामुपस्थितम्। स्मरिष्यति त्वां न स बोधितोऽपि सन् कथां प्रमत्त: प्रथमं कृतामिव।।’’
D. ‘तपोधनं वेत्सि न माम् उपस्थितम्’ इस वाक्य से दुर्वासा ऋषि का परिचय मिलता है। यह पद्य शाकुन्तलम् के चतुर्थ अङ्क का है जब शकुन्तला राजा दुष्यन्त की चिन्ता में मग्न थी उसी समय दुर्वासा आ जाते हैं और शकुन्तला उनका आगमन नहीं जान पाती तब दुर्वासा ऋषि कहते हैं– ‘‘विचिन्त्यन्ती यमनन्यमानसा तपोधनं वेत्सि न मामुपस्थितम्। स्मरिष्यति त्वां न स बोधितोऽपि सन् कथां प्रमत्त: प्रथमं कृतामिव।।’’

Explanations:

‘तपोधनं वेत्सि न माम् उपस्थितम्’ इस वाक्य से दुर्वासा ऋषि का परिचय मिलता है। यह पद्य शाकुन्तलम् के चतुर्थ अङ्क का है जब शकुन्तला राजा दुष्यन्त की चिन्ता में मग्न थी उसी समय दुर्वासा आ जाते हैं और शकुन्तला उनका आगमन नहीं जान पाती तब दुर्वासा ऋषि कहते हैं– ‘‘विचिन्त्यन्ती यमनन्यमानसा तपोधनं वेत्सि न मामुपस्थितम्। स्मरिष्यति त्वां न स बोधितोऽपि सन् कथां प्रमत्त: प्रथमं कृतामिव।।’’