Correct Answer:
Option B - `तेन पाठ: पठ्यते' में कर्मवाच्य का प्रयोग किया गया है। जब वाक्य में कर्म की प्रधानता होती है तब कर्मवाच्य होता है। कर्मवाच्य सदा सकर्मक धातुओं के साथ होता है। इसमें क्रिया सदैव आत्मनेपद में होती है, परस्मैपद में नहीं। कर्म वाच्य में कर्ता में तृतीया विभक्ति और कर्म में प्रथमा विभक्ति होती है। कर्ता के पुरुष तथा वचन का क्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। प्रस्तुत वाक्य में कर्ता में तृतीया विभक्ति , कर्म में प्रथमा विभक्ति तथा क्रिया में आत्मनेपद का प्रयोग हुआ है।
B. `तेन पाठ: पठ्यते' में कर्मवाच्य का प्रयोग किया गया है। जब वाक्य में कर्म की प्रधानता होती है तब कर्मवाच्य होता है। कर्मवाच्य सदा सकर्मक धातुओं के साथ होता है। इसमें क्रिया सदैव आत्मनेपद में होती है, परस्मैपद में नहीं। कर्म वाच्य में कर्ता में तृतीया विभक्ति और कर्म में प्रथमा विभक्ति होती है। कर्ता के पुरुष तथा वचन का क्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। प्रस्तुत वाक्य में कर्ता में तृतीया विभक्ति , कर्म में प्रथमा विभक्ति तथा क्रिया में आत्मनेपद का प्रयोग हुआ है।