search
Q: तुमुन्-प्रत्ययविधिसूत्रमस्ति –
  • A. काल-समय-वेलासु
  • B. युवोरनाकौ
  • C. पुव: संज्ञायाम्
  • D. सनाशंसभिक्ष
Correct Answer: Option A - तुमुन् - प्रत्यय विधिसूत्रम्-काल समय वेलासु अस्ति। ‘कालसमयवेलासु तुमुन्’ इस सूत्र से काल, समय, वेला आदि समयवाचक शब्दों के उपपद रहते धातु से परे तुमुन् प्रत्यय होता है। तुमुन् प्रत्यय में ‘तुम्’ शेष बचता है। तुमुन् प्रत्यान्त शब्द अव्यय होते हैं, तुमुन् प्रत्यय सभी धातुओं में होता है। उदाहरणार्थ- भोक्तुम्- भुज् धातु से तुमुन्, अनुबन्ध लोप, उपधागुण होकर भोज+ तुम् बना। चो: कु: से जकार को कुत्व ककार हुआ, वर्ण सम्मेलन स्वादि कार्य होकर ‘भोक्तुम्’ रूप सिद्ध हुआ।
A. तुमुन् - प्रत्यय विधिसूत्रम्-काल समय वेलासु अस्ति। ‘कालसमयवेलासु तुमुन्’ इस सूत्र से काल, समय, वेला आदि समयवाचक शब्दों के उपपद रहते धातु से परे तुमुन् प्रत्यय होता है। तुमुन् प्रत्यय में ‘तुम्’ शेष बचता है। तुमुन् प्रत्यान्त शब्द अव्यय होते हैं, तुमुन् प्रत्यय सभी धातुओं में होता है। उदाहरणार्थ- भोक्तुम्- भुज् धातु से तुमुन्, अनुबन्ध लोप, उपधागुण होकर भोज+ तुम् बना। चो: कु: से जकार को कुत्व ककार हुआ, वर्ण सम्मेलन स्वादि कार्य होकर ‘भोक्तुम्’ रूप सिद्ध हुआ।

Explanations:

तुमुन् - प्रत्यय विधिसूत्रम्-काल समय वेलासु अस्ति। ‘कालसमयवेलासु तुमुन्’ इस सूत्र से काल, समय, वेला आदि समयवाचक शब्दों के उपपद रहते धातु से परे तुमुन् प्रत्यय होता है। तुमुन् प्रत्यय में ‘तुम्’ शेष बचता है। तुमुन् प्रत्यान्त शब्द अव्यय होते हैं, तुमुन् प्रत्यय सभी धातुओं में होता है। उदाहरणार्थ- भोक्तुम्- भुज् धातु से तुमुन्, अनुबन्ध लोप, उपधागुण होकर भोज+ तुम् बना। चो: कु: से जकार को कुत्व ककार हुआ, वर्ण सम्मेलन स्वादि कार्य होकर ‘भोक्तुम्’ रूप सिद्ध हुआ।