Correct Answer:
Option A - व्याख्या ‘तिलचट्टा’ (1972) नाटक के लेखक मुद्राराक्षस है। इस नाटक में स्त्री-पुरुष की यौन-कुण्ठा का चित्रण किया गया है। मुद्राराक्षस द्वारा रचित अन्य नाटक है – योर्स फेतफुली (1974), मरजीवा, तेन्दुआ, प्रथम प्रस्तुति, आलाअफसर (1979), गुफाएं (1979) सन्तोला (1980) इत्यादि। जबकि सुरेन्द्र वर्मा ने द्रौपदी सेतुबन्ध, सूर्य की अंतिम किरण से पहली किरण तक, आठवाँ सर्ग, शकुन्तला की अँगूठी, क़ैद एहयात, एक दूनी एक तथा मोहन राकेश ने आषाढ़ का एकदिन (1958), लहरों के राजहंस (1963) आधे-अधूरे (1969) नामक नाटकों की रचना की है।
A. व्याख्या ‘तिलचट्टा’ (1972) नाटक के लेखक मुद्राराक्षस है। इस नाटक में स्त्री-पुरुष की यौन-कुण्ठा का चित्रण किया गया है। मुद्राराक्षस द्वारा रचित अन्य नाटक है – योर्स फेतफुली (1974), मरजीवा, तेन्दुआ, प्रथम प्रस्तुति, आलाअफसर (1979), गुफाएं (1979) सन्तोला (1980) इत्यादि। जबकि सुरेन्द्र वर्मा ने द्रौपदी सेतुबन्ध, सूर्य की अंतिम किरण से पहली किरण तक, आठवाँ सर्ग, शकुन्तला की अँगूठी, क़ैद एहयात, एक दूनी एक तथा मोहन राकेश ने आषाढ़ का एकदिन (1958), लहरों के राजहंस (1963) आधे-अधूरे (1969) नामक नाटकों की रचना की है।