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Q: टीकाकार मल्लिनाथ ने कालिदास कृत ‘कुमार सम्भवम्’ के कितने सर्गों पर संजीवनी लिखी है?
  • A. 4
  • B. 6
  • C. 8
  • D. 10
Correct Answer: Option C - टीकाकार मल्लिनाथ ने कालिदास कृत ‘कुमार संभवम्’ के 8 सर्गों पर संजीवनी लिखी है। ‘कुमार संभवम्’ 17 सर्गों का महाकाव्य है जिसके प्रथम 8 सर्ग ही कालिदास द्वारा रचित माने जाते हैं। मल्लिनाथ का पूरा नाम ‘कोलाचल मल्लिनाथ’ था। इनका समय लगभग 14वीं या 15वीं शती माना जाता है। इन्होंने पंचमहाकाव्यों (अभिज्ञानशाकुन्तलम्, रघुवंशम्, शिशुपालवध, किरातार्जुनीयम् तथा नैषधीय चरितम्) पर टीकाएँ लिखी हैं।
C. टीकाकार मल्लिनाथ ने कालिदास कृत ‘कुमार संभवम्’ के 8 सर्गों पर संजीवनी लिखी है। ‘कुमार संभवम्’ 17 सर्गों का महाकाव्य है जिसके प्रथम 8 सर्ग ही कालिदास द्वारा रचित माने जाते हैं। मल्लिनाथ का पूरा नाम ‘कोलाचल मल्लिनाथ’ था। इनका समय लगभग 14वीं या 15वीं शती माना जाता है। इन्होंने पंचमहाकाव्यों (अभिज्ञानशाकुन्तलम्, रघुवंशम्, शिशुपालवध, किरातार्जुनीयम् तथा नैषधीय चरितम्) पर टीकाएँ लिखी हैं।

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टीकाकार मल्लिनाथ ने कालिदास कृत ‘कुमार संभवम्’ के 8 सर्गों पर संजीवनी लिखी है। ‘कुमार संभवम्’ 17 सर्गों का महाकाव्य है जिसके प्रथम 8 सर्ग ही कालिदास द्वारा रचित माने जाते हैं। मल्लिनाथ का पूरा नाम ‘कोलाचल मल्लिनाथ’ था। इनका समय लगभग 14वीं या 15वीं शती माना जाता है। इन्होंने पंचमहाकाव्यों (अभिज्ञानशाकुन्तलम्, रघुवंशम्, शिशुपालवध, किरातार्जुनीयम् तथा नैषधीय चरितम्) पर टीकाएँ लिखी हैं।