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Q: तेजोद्वयस्य युगपद् व्यसनोदयाभ्यां लोकोनियम्यत ‘इवात्मदशान्तरेषु’ यह पंक्ति है-
  • A. मेघदूत की
  • B. रघुवंश की
  • C. उत्तररामचरित की
  • D. अभिज्ञानशाकुन्तल की
Correct Answer: Option D - कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञानशाकुन्तलं में 7 अंक हैं, जो एक प्रकार का नाटक है, उपरोक्त पंक्ति अभिज्ञान के चतुर्थ अंक से ली गयी है। महर्षि कण्व का शिष्य समयानुमान करते हुए कहता है- यात्येकतोऽस्तशिखरं पतिरोषधीनां माविष्कृतोऽरुणपुर: सर एकतोऽर्क:। तेजोद्वयस्य युगपद् व्यसनोदयाभ्यां, लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।
D. कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञानशाकुन्तलं में 7 अंक हैं, जो एक प्रकार का नाटक है, उपरोक्त पंक्ति अभिज्ञान के चतुर्थ अंक से ली गयी है। महर्षि कण्व का शिष्य समयानुमान करते हुए कहता है- यात्येकतोऽस्तशिखरं पतिरोषधीनां माविष्कृतोऽरुणपुर: सर एकतोऽर्क:। तेजोद्वयस्य युगपद् व्यसनोदयाभ्यां, लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।

Explanations:

कालिदास द्वारा रचित अभिज्ञानशाकुन्तलं में 7 अंक हैं, जो एक प्रकार का नाटक है, उपरोक्त पंक्ति अभिज्ञान के चतुर्थ अंक से ली गयी है। महर्षि कण्व का शिष्य समयानुमान करते हुए कहता है- यात्येकतोऽस्तशिखरं पतिरोषधीनां माविष्कृतोऽरुणपुर: सर एकतोऽर्क:। तेजोद्वयस्य युगपद् व्यसनोदयाभ्यां, लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।