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Q: According to the classical Indian School of logic, which of the following instruments of knowledge is defined as the knowledge of the relation between a word and its denotation and is produced by the knowledge of resemblance or similarity?
  • A. Pratyaksa (Perception)/प्रत्यक्ष
  • B. Anumana (Inference)/अनुमान
  • C. Upamana (Comparison)/उपमान
  • D. S'abda (Verbal testimony)/शब्द
Correct Answer: Option C - प्राचीन भारतीय तर्कशास्त्र मत के अनुसार, उपमान वह साधन है जो शब्द और इसके वस्त्वर्थ के बीच संबंध के ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जाता है और सादृश्यता के ज्ञान के रूप में उत्पन्न किया जाता हैं। इसका मतलब है कि हम किसी वस्तु के बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं, क्योंकि वह किसी अन्य ज्ञात वस्तु के समान है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने पहले कभी ‘गवय’ नामक जानवर नही देखा है, और उसे बताया जाता है कि ‘गवय’ गाय जैसा दिखता है, तो वह गाय और ‘गवय’ के बीच समानता के आधार पर ‘गवय’ के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है। वह गाय की विशेषताओं (जैसे आकार, चार पैर, सींग आदि) के आधार पर ‘गवय’ की छवि मानसिक रूप से बना लेता है। यह सादृश्य के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने का तरीका है, जहाँ पहले से ज्ञात वस्तु (गाय) के गुणों को अज्ञात वस्तु (गवय) पर लागू किया जाता है।
C. प्राचीन भारतीय तर्कशास्त्र मत के अनुसार, उपमान वह साधन है जो शब्द और इसके वस्त्वर्थ के बीच संबंध के ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जाता है और सादृश्यता के ज्ञान के रूप में उत्पन्न किया जाता हैं। इसका मतलब है कि हम किसी वस्तु के बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं, क्योंकि वह किसी अन्य ज्ञात वस्तु के समान है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने पहले कभी ‘गवय’ नामक जानवर नही देखा है, और उसे बताया जाता है कि ‘गवय’ गाय जैसा दिखता है, तो वह गाय और ‘गवय’ के बीच समानता के आधार पर ‘गवय’ के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है। वह गाय की विशेषताओं (जैसे आकार, चार पैर, सींग आदि) के आधार पर ‘गवय’ की छवि मानसिक रूप से बना लेता है। यह सादृश्य के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने का तरीका है, जहाँ पहले से ज्ञात वस्तु (गाय) के गुणों को अज्ञात वस्तु (गवय) पर लागू किया जाता है।

Explanations:

प्राचीन भारतीय तर्कशास्त्र मत के अनुसार, उपमान वह साधन है जो शब्द और इसके वस्त्वर्थ के बीच संबंध के ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जाता है और सादृश्यता के ज्ञान के रूप में उत्पन्न किया जाता हैं। इसका मतलब है कि हम किसी वस्तु के बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं, क्योंकि वह किसी अन्य ज्ञात वस्तु के समान है। उदाहरण के लिए, यदि किसी ने पहले कभी ‘गवय’ नामक जानवर नही देखा है, और उसे बताया जाता है कि ‘गवय’ गाय जैसा दिखता है, तो वह गाय और ‘गवय’ के बीच समानता के आधार पर ‘गवय’ के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है। वह गाय की विशेषताओं (जैसे आकार, चार पैर, सींग आदि) के आधार पर ‘गवय’ की छवि मानसिक रूप से बना लेता है। यह सादृश्य के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने का तरीका है, जहाँ पहले से ज्ञात वस्तु (गाय) के गुणों को अज्ञात वस्तु (गवय) पर लागू किया जाता है।