Correct Answer:
Option C - सिफिलिस (Syphilis) संभोग द्वारा प्रसारित जीवाणु-जनित रोग है। यह रोग जीवाणु ट्रीपोनीमा पैलिडम के संक्रमण से होता है। इसके संक्रमित स्थान ग्रसनी, मलाशय, होठों, लिंग में बैगनी सा वृत्ताकार घाव बन जाता है। कुछ सप्ताह बाद ज्वर, लसिका गाँठो में सूजन तथा त्वचा पर चेचक जैसे- दरोरे बनने लगती है। इसके उपचार हेतु प्राय: टेट्रासाइक्लिन एवं पेनिसिलीन का उपयोग करते है।
C. सिफिलिस (Syphilis) संभोग द्वारा प्रसारित जीवाणु-जनित रोग है। यह रोग जीवाणु ट्रीपोनीमा पैलिडम के संक्रमण से होता है। इसके संक्रमित स्थान ग्रसनी, मलाशय, होठों, लिंग में बैगनी सा वृत्ताकार घाव बन जाता है। कुछ सप्ताह बाद ज्वर, लसिका गाँठो में सूजन तथा त्वचा पर चेचक जैसे- दरोरे बनने लगती है। इसके उपचार हेतु प्राय: टेट्रासाइक्लिन एवं पेनिसिलीन का उपयोग करते है।