Explanations:
इन्दिरा साहनी मामले (1992) में सर्वोच्च अदालत ने सरकार के निर्णय को बरकरार रखा और घोषणा की कि ओबीसी के उन्नत वर्गों (यानी क्रीमीलेयर) को आरक्षण के लाभार्थियों की सूची से बाहर रखा जाए। साथ ही यह भी निर्णय दिया कि एस.सी. और एसटी वर्ग को क्रीमीलेय को अवधारणा से बाहर रखा जाना चाहिए, सर्वाेच्च न्यायालय ने इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में अनुच्छेद 16(4) के सन्दर्भ में निर्णय केवल आरम्भिक नियुक्ति तक है। प्रोन्नति में नहीं। इसमें यह भी सुनिश्चित किया गया कि आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए।