Correct Answer:
Option D - रिसन गर्त या गढ्ढे (Soak Pits)– सैप्टिक टैंक से बाहर निकलने वाला पानी पूर्ण रूप से साफ नहीं होता है। इसमें कुछ दुर्गंध व प्रदूषण रह सकता है। अत: इस दूषित पानी का उचित ढंग से समापन करना आवश्यक है। इस पानी को रिसन गर्त या गड्ढों में डाल दिया जाता है। भूमि में मल, जल की रिसन दर 1200से 1600 लीटर/घन मी./दिन ली जाती है।
∎ रिसन गर्त का भीतरी, व्यास 90 सेमी. से कम नहीं होना चाहिए तथा प्रवेश पाइप से गहरायी कम से कम 1मीटर होनी चाहिए।
∎ जहाँ पर भौम जल तल 1.80 मीटर से कम है वहाँ रिसन गर्त नहीं बनाने चाहिए।
∎ रिसन गर्त का निर्माण रन्ध्रयुक्त मृदा पर करते है।
D. रिसन गर्त या गढ्ढे (Soak Pits)– सैप्टिक टैंक से बाहर निकलने वाला पानी पूर्ण रूप से साफ नहीं होता है। इसमें कुछ दुर्गंध व प्रदूषण रह सकता है। अत: इस दूषित पानी का उचित ढंग से समापन करना आवश्यक है। इस पानी को रिसन गर्त या गड्ढों में डाल दिया जाता है। भूमि में मल, जल की रिसन दर 1200से 1600 लीटर/घन मी./दिन ली जाती है।
∎ रिसन गर्त का भीतरी, व्यास 90 सेमी. से कम नहीं होना चाहिए तथा प्रवेश पाइप से गहरायी कम से कम 1मीटर होनी चाहिए।
∎ जहाँ पर भौम जल तल 1.80 मीटर से कम है वहाँ रिसन गर्त नहीं बनाने चाहिए।
∎ रिसन गर्त का निर्माण रन्ध्रयुक्त मृदा पर करते है।