search
Q: Study the given statements with respect to soak pits and choose the correct option. 1. Soak pits are preferable at locations, where the water table level is high. 2. Soak pits are preferable at locations where soils is porous. रिसनगर्त (Soak pits के संदर्भ में दिए गए कथनों का अध्ययन करें और सही विकल्प का चयन करें। 1. उन स्थानों पर रिसनगर्तों को प्राथमिकता दी जाती है, जहाँ भौम जलस्तर उच्च होता है। 2. उन स्थानों पर रिसनगर्तों को प्राथमिकता दी जाती है, जहाँ मृदा रंध्रयुक्त होती है।
  • A. Both the statements are false/दोनों कथन गलत हैं।
  • B. Statement 1 is true and statement 2 is false/कथन 1 सही है और कथन 2 गलत है।
  • C. Both the statements are true/दोनों कथन सही हैं।
  • D. Statement 1 is false and statement 2 is true./कथन 1 गलत है और कथन 2 सही है।
Correct Answer: Option D - रिसन गर्त या गढ्ढे (Soak Pits)– सैप्टिक टैंक से बाहर निकलने वाला पानी पूर्ण रूप से साफ नहीं होता है। इसमें कुछ दुर्गंध व प्रदूषण रह सकता है। अत: इस दूषित पानी का उचित ढंग से समापन करना आवश्यक है। इस पानी को रिसन गर्त या गड्ढों में डाल दिया जाता है। भूमि में मल, जल की रिसन दर 1200से 1600 लीटर/घन मी./दिन ली जाती है। ∎ रिसन गर्त का भीतरी, व्यास 90 सेमी. से कम नहीं होना चाहिए तथा प्रवेश पाइप से गहरायी कम से कम 1मीटर होनी चाहिए। ∎ जहाँ पर भौम जल तल 1.80 मीटर से कम है वहाँ रिसन गर्त नहीं बनाने चाहिए। ∎ रिसन गर्त का निर्माण रन्ध्रयुक्त मृदा पर करते है।
D. रिसन गर्त या गढ्ढे (Soak Pits)– सैप्टिक टैंक से बाहर निकलने वाला पानी पूर्ण रूप से साफ नहीं होता है। इसमें कुछ दुर्गंध व प्रदूषण रह सकता है। अत: इस दूषित पानी का उचित ढंग से समापन करना आवश्यक है। इस पानी को रिसन गर्त या गड्ढों में डाल दिया जाता है। भूमि में मल, जल की रिसन दर 1200से 1600 लीटर/घन मी./दिन ली जाती है। ∎ रिसन गर्त का भीतरी, व्यास 90 सेमी. से कम नहीं होना चाहिए तथा प्रवेश पाइप से गहरायी कम से कम 1मीटर होनी चाहिए। ∎ जहाँ पर भौम जल तल 1.80 मीटर से कम है वहाँ रिसन गर्त नहीं बनाने चाहिए। ∎ रिसन गर्त का निर्माण रन्ध्रयुक्त मृदा पर करते है।

Explanations:

रिसन गर्त या गढ्ढे (Soak Pits)– सैप्टिक टैंक से बाहर निकलने वाला पानी पूर्ण रूप से साफ नहीं होता है। इसमें कुछ दुर्गंध व प्रदूषण रह सकता है। अत: इस दूषित पानी का उचित ढंग से समापन करना आवश्यक है। इस पानी को रिसन गर्त या गड्ढों में डाल दिया जाता है। भूमि में मल, जल की रिसन दर 1200से 1600 लीटर/घन मी./दिन ली जाती है। ∎ रिसन गर्त का भीतरी, व्यास 90 सेमी. से कम नहीं होना चाहिए तथा प्रवेश पाइप से गहरायी कम से कम 1मीटर होनी चाहिए। ∎ जहाँ पर भौम जल तल 1.80 मीटर से कम है वहाँ रिसन गर्त नहीं बनाने चाहिए। ∎ रिसन गर्त का निर्माण रन्ध्रयुक्त मृदा पर करते है।