Correct Answer:
Option A - व्याख्या : सौर ऊर्जा की उत्पत्ति नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया द्वारा होती है। इस नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया में हाइड्रोजन के परमाणु मिलकर हीलियम नाभिक में परिवर्तित होते रहते हैं। इस प्रक्रिया में अपार ऊर्जा विमुक्त होती है।
A. व्याख्या : सौर ऊर्जा की उत्पत्ति नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया द्वारा होती है। इस नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया में हाइड्रोजन के परमाणु मिलकर हीलियम नाभिक में परिवर्तित होते रहते हैं। इस प्रक्रिया में अपार ऊर्जा विमुक्त होती है।