Correct Answer:
Option C - चुम्बकीय दिक्मान (Magnetic Bearing)– किसी रेखा द्वारा चुम्बकीय दिक्मान तथा रेखा द्वारा सत्य याम्योत्तर के साथ बनाया गया कोण सत्य दिक्मान कहलाता है। किसी बिन्दु पर, एक चुम्बकीय सुई पूर्णत: सन्तुलित एवं मुक्त अवस्था में तथा स्थानीय आकर्षणों से अप्रभावित, क्षैतिज लटकाये जाने पर जो दिशा बताती है, उस दिशा को (उस बिन्दु का) चुम्बकीय याम्योत्तर कहते हैं। चुम्बकीय याम्योत्तर किसी भी चुम्बकीय दिक्सूचक (Magnetic compass) द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। चुम्बकीय याम्योत्तर की दिशा, चुम्बकीय बलों की भिन्नता के कारण, समय-समय पर बदलती रहती है।
C. चुम्बकीय दिक्मान (Magnetic Bearing)– किसी रेखा द्वारा चुम्बकीय दिक्मान तथा रेखा द्वारा सत्य याम्योत्तर के साथ बनाया गया कोण सत्य दिक्मान कहलाता है। किसी बिन्दु पर, एक चुम्बकीय सुई पूर्णत: सन्तुलित एवं मुक्त अवस्था में तथा स्थानीय आकर्षणों से अप्रभावित, क्षैतिज लटकाये जाने पर जो दिशा बताती है, उस दिशा को (उस बिन्दु का) चुम्बकीय याम्योत्तर कहते हैं। चुम्बकीय याम्योत्तर किसी भी चुम्बकीय दिक्सूचक (Magnetic compass) द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। चुम्बकीय याम्योत्तर की दिशा, चुम्बकीय बलों की भिन्नता के कारण, समय-समय पर बदलती रहती है।