Correct Answer:
Option B - ‘शांत रस’ का स्थायी भाव ‘निर्वेद’ है। रस की उत्पत्ति मन की विभिन्न प्रवृत्तियों से होती है। इन प्रवृत्तियों को स्थायी भाव कहा जाता है। जो इस प्रकार हैं–
रस – स्थायी भाव
शृंगार रस – रति
हास्य रस – हास
रौद्र रस – क्रोध
करूण रस – शोक
वीभत्स रस – घृणा/जुगुप्सा
भयानक रस – भय
वीर रस – उत्साह
अद्भुत रस – विस्मय
शांत रस – निर्वेद
B. ‘शांत रस’ का स्थायी भाव ‘निर्वेद’ है। रस की उत्पत्ति मन की विभिन्न प्रवृत्तियों से होती है। इन प्रवृत्तियों को स्थायी भाव कहा जाता है। जो इस प्रकार हैं–
रस – स्थायी भाव
शृंगार रस – रति
हास्य रस – हास
रौद्र रस – क्रोध
करूण रस – शोक
वीभत्स रस – घृणा/जुगुप्सा
भयानक रस – भय
वीर रस – उत्साह
अद्भुत रस – विस्मय
शांत रस – निर्वेद