Correct Answer:
Option D - श्रीमद्भगवद्गीता में असती माया का गुण नहीं है। गीता के अध्याय सात श्लोक चौदह में वर्णित है –
दैवी हयेषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
मामेव में प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।।
(हे अर्जुन!) क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया दुरव्यय अर्थात् उससे पार पाना बड़ा कठिन है जो केवल मेरे ही शरण होते हैं। वे इस माया से तर जाते हैं।
D. श्रीमद्भगवद्गीता में असती माया का गुण नहीं है। गीता के अध्याय सात श्लोक चौदह में वर्णित है –
दैवी हयेषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
मामेव में प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।।
(हे अर्जुन!) क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया दुरव्यय अर्थात् उससे पार पाना बड़ा कठिन है जो केवल मेरे ही शरण होते हैं। वे इस माया से तर जाते हैं।