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Q: श्रीमद्भगवद्गीता' के अनुसार मनुष्य का अधिकार है –
  • A. ज्ञान पर
  • B. कर्म करने पर
  • C. फल पर
  • D. इनमें से किसी पर नहीं
Correct Answer: Option B - श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार मनुष्य का अधिकार कर्म करने पर है। गीता अध्याय 2 श्लोक 47 में कहा गया है – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। तेरा कर्म करने में ही अधिकार है उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो (तथा) तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति हो।
B. श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार मनुष्य का अधिकार कर्म करने पर है। गीता अध्याय 2 श्लोक 47 में कहा गया है – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। तेरा कर्म करने में ही अधिकार है उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो (तथा) तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति हो।

Explanations:

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार मनुष्य का अधिकार कर्म करने पर है। गीता अध्याय 2 श्लोक 47 में कहा गया है – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।। तेरा कर्म करने में ही अधिकार है उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो (तथा) तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति हो।