Correct Answer:
Option B - ``सदानुवूâलेषु हि कुर्वते रिंत, नृपेष्वमात्येषु च सर्वसम्पद:।'' यह वनेचर द्वारा कहा गया है। यह श्लोकांश भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से लिया गया है। इसका आशय है कि ``राजाओं तथा सचिवों के परस्पर अनुकूल रहने पर ही समग्र सम्पत्तियाँ सदैव अनुराग करती हैं।''
B. ``सदानुवूâलेषु हि कुर्वते रिंत, नृपेष्वमात्येषु च सर्वसम्पद:।'' यह वनेचर द्वारा कहा गया है। यह श्लोकांश भारवि कृत किरातार्जुनीयम् के प्रथम सर्ग से लिया गया है। इसका आशय है कि ``राजाओं तथा सचिवों के परस्पर अनुकूल रहने पर ही समग्र सम्पत्तियाँ सदैव अनुराग करती हैं।''