Correct Answer:
Option D - शङ्कुक ‘‘साहित्यशास्त्रे’’ प्रसिद्ध जात:। अर्थात् ‘शङ्कुक ’ साहित्य शास्त्र में प्रसिद्ध हुये।
शंकुक भरतनाट्य शास्त्र के व्याख्याता है। उनका मानना है ‘‘रस प्रक्रिया के लिए एक नये तथ्य को प्रस्तुत करते है कि रस की स्थिति अनुकार्य (मूलपात्र) में होती है। नत अपने कुशल अभिनय द्वारा हाव-भाव के माध्यम से उसे प्रदर्शित करना चाहता है। वस्तुत: नट में रस की स्थिति नहीं है पर उसमें रस का अनुमान कर लिया जाता है। यही अनुमितिवाद है।
D. शङ्कुक ‘‘साहित्यशास्त्रे’’ प्रसिद्ध जात:। अर्थात् ‘शङ्कुक ’ साहित्य शास्त्र में प्रसिद्ध हुये।
शंकुक भरतनाट्य शास्त्र के व्याख्याता है। उनका मानना है ‘‘रस प्रक्रिया के लिए एक नये तथ्य को प्रस्तुत करते है कि रस की स्थिति अनुकार्य (मूलपात्र) में होती है। नत अपने कुशल अभिनय द्वारा हाव-भाव के माध्यम से उसे प्रदर्शित करना चाहता है। वस्तुत: नट में रस की स्थिति नहीं है पर उसमें रस का अनुमान कर लिया जाता है। यही अनुमितिवाद है।