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Q: शिक्षण अधिगम प्रक्रिया यात्रा है-
  • A. ठोस से अमूर्त्य की ओर
  • B. ज्ञात से अज्ञात की ओर
  • C. सरल से कठिन की ओर
  • D. उपरोक्त सभी
Correct Answer: Option D - शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की यात्रा प्राय: ठोस से अमूर्त की ओर, ज्ञात से अज्ञात की ओर, सरल से ठोस की ओर होती है। प्रत्येक बच्चा स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित होता है। बच्चों के सीखने के तौर-तरीके में विविधता होती है। जैसे अनुभवों के माध्यम से, प्रश्न पूछने, सुनने, सोचने, चिंतन करने, अभिव्यक्त करने, छोटे एवं बड़े समूहों में गतिविधियाँ करने आदि से सीखते हैं। सीखने की प्रक्रिया न केवल विद्यालय में वरन् विद्यालय के बाहर भी निरन्तर चलती रहती है। अत: शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया इस प्रकार संचालित की जानी चाहिए ताकि बच्चा सीखने की प्रक्रिया में संलग्न हो जाए।
D. शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की यात्रा प्राय: ठोस से अमूर्त की ओर, ज्ञात से अज्ञात की ओर, सरल से ठोस की ओर होती है। प्रत्येक बच्चा स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित होता है। बच्चों के सीखने के तौर-तरीके में विविधता होती है। जैसे अनुभवों के माध्यम से, प्रश्न पूछने, सुनने, सोचने, चिंतन करने, अभिव्यक्त करने, छोटे एवं बड़े समूहों में गतिविधियाँ करने आदि से सीखते हैं। सीखने की प्रक्रिया न केवल विद्यालय में वरन् विद्यालय के बाहर भी निरन्तर चलती रहती है। अत: शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया इस प्रकार संचालित की जानी चाहिए ताकि बच्चा सीखने की प्रक्रिया में संलग्न हो जाए।

Explanations:

शिक्षण अधिगम प्रक्रिया की यात्रा प्राय: ठोस से अमूर्त की ओर, ज्ञात से अज्ञात की ओर, सरल से ठोस की ओर होती है। प्रत्येक बच्चा स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित होता है। बच्चों के सीखने के तौर-तरीके में विविधता होती है। जैसे अनुभवों के माध्यम से, प्रश्न पूछने, सुनने, सोचने, चिंतन करने, अभिव्यक्त करने, छोटे एवं बड़े समूहों में गतिविधियाँ करने आदि से सीखते हैं। सीखने की प्रक्रिया न केवल विद्यालय में वरन् विद्यालय के बाहर भी निरन्तर चलती रहती है। अत: शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया इस प्रकार संचालित की जानी चाहिए ताकि बच्चा सीखने की प्रक्रिया में संलग्न हो जाए।