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Q: .
  • A. प्रकृति की रक्षा को लेकर चिंता
  • B. मूलवासी लोगों और प्राकृतिक पर्यावासों के लिए पर्यावरण सुरक्षा
  • C. मानवीय गतिविधियों से खतेरे की हद तक नुकसान
  • D. उपरोक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकार का कारण मानवीय गतिविधयों से खतरे की हद तक नुकसान। मानवीय गतिविधियों का तीव्र रूप से बढ़ने से प्राकृतिक आवास खत्म हुए हैं, जिससे जैविक अस्थिरता पैदा हुई है। इसके अतिरिक्त तीव्र औद्योगीकरण से ग्रीन हाउस गैस तथा क्लाइमेट चेंज जैसी घटनाओं में तीव्रता आयी है।
C. पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकार का कारण मानवीय गतिविधयों से खतरे की हद तक नुकसान। मानवीय गतिविधियों का तीव्र रूप से बढ़ने से प्राकृतिक आवास खत्म हुए हैं, जिससे जैविक अस्थिरता पैदा हुई है। इसके अतिरिक्त तीव्र औद्योगीकरण से ग्रीन हाउस गैस तथा क्लाइमेट चेंज जैसी घटनाओं में तीव्रता आयी है।

Explanations:

पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकार का कारण मानवीय गतिविधयों से खतरे की हद तक नुकसान। मानवीय गतिविधियों का तीव्र रूप से बढ़ने से प्राकृतिक आवास खत्म हुए हैं, जिससे जैविक अस्थिरता पैदा हुई है। इसके अतिरिक्त तीव्र औद्योगीकरण से ग्रीन हाउस गैस तथा क्लाइमेट चेंज जैसी घटनाओं में तीव्रता आयी है।