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Q: Select the correct option for the given statements. दिये गये कथनों के लिए सही विकल्प का चयन करें- Statement/कथन 1: Consolidation is due to a reduction in the volume of air voids at a given water content./ संघनन किसी दिए गए जलांश पर वायु रिक्तियों की मात्रा में कमी के कारण होता है Statement/कथन 2: In compaction volume reduction is due to expulsion of pore water from voids. संहनन में आयतन में कमी रन्ध्रों से पानी के निष्कासन के कारण होती है-
  • A. Both statement 1 and statement 2 are false कथन 1 तथा कथन 2 दोनों गलत है।
  • B. Statement 1 is true but statement 2 is false कथन 1 सही है लेकिन कथन 2 सही है।
  • C. Both statements 1 and statement 2 are true but statement 2 is not the correct explanation of statement 1 कथन 1 तथा कथन 2 दोनों सही है लेकिन कथन 2, कथन 1 की सही व्याख्या नहीं करता है।
  • D. Both statements 1 and statement 2 are true and statement 2 is the correct explanation of statement 1/कथन 1 तथा कथन 2 दोनों सही हैं तथा कथन 2 कथन 1 की सही व्याख्या करता है।
Correct Answer: Option A - संहनन (Compaction):- किसी दिये गये जलांश पर मृदा रन्ध्रों से वायु के निकलने के कारण आयतन में कमी होना, संहनन कहलाता है। संघनन (Consolidation):- आधिक्य रन्ध्र जल दाब (Excess Pore Water Pressure) के कारण मृदा रन्ध्रों से जल के निकलने के परिणामस्वरूप, आयतन में कमी होने की घटना संघनन कहलाती है। प्रारम्भिक–संघनन (Initial consolidation)– आंशिक रूप से संतृप्त मृदा पिण्डों पर जब दाब पड़ता है तो प्रारम्भ में उनके आयतन में अपेक्षाकृत तेजी से कमी आती है जो मुख्यत: मृदा रन्ध्रों में उपस्थित वायु के दबने, निकलने एवं उसके जल में घुलने के कारण आती है। यह क्रिया प्रारम्भिक संघनन (Initial consolidation) कहलाती है। प्राथमिक संघनन (Primary consolidation)– वह क्रिया, जिसमें मृदा पिण्ड में लगातार स्थिर दाब (Sustained pressure) के कारण आयतन में कमी मुख्यत: मृदा रन्ध्रों से जल निकलने के कारण आती है तथा जिसमें रन्ध्र जल से मृदा कणों पर प्रतिबल स्थानान्तरण होता है, प्रारम्भिक संघनन कहलाता है। द्वितीय संघनन (Secondary consolidation)– मृदा रन्ध्रों से सम्पूर्ण अति द्रवीय स्थैतिक दाब (Excess hydrostatic pressure) लगाने के बाद भी मृदा के आयतन में कुछ कमी आती है जिसकी गति काफी धीमी रहती है, इसे द्वितीय संघनन (Secondary consolidation) कहते हैं, इसे ही विसर्पण संघनन (Creep Consolidation) कहते है । यह मृदा के कणों के पुनर्गठन (Rearrangement of particle) के कारण होता है। नोट- आयोग ने विकल्प (c) को सही माना है।
A. संहनन (Compaction):- किसी दिये गये जलांश पर मृदा रन्ध्रों से वायु के निकलने के कारण आयतन में कमी होना, संहनन कहलाता है। संघनन (Consolidation):- आधिक्य रन्ध्र जल दाब (Excess Pore Water Pressure) के कारण मृदा रन्ध्रों से जल के निकलने के परिणामस्वरूप, आयतन में कमी होने की घटना संघनन कहलाती है। प्रारम्भिक–संघनन (Initial consolidation)– आंशिक रूप से संतृप्त मृदा पिण्डों पर जब दाब पड़ता है तो प्रारम्भ में उनके आयतन में अपेक्षाकृत तेजी से कमी आती है जो मुख्यत: मृदा रन्ध्रों में उपस्थित वायु के दबने, निकलने एवं उसके जल में घुलने के कारण आती है। यह क्रिया प्रारम्भिक संघनन (Initial consolidation) कहलाती है। प्राथमिक संघनन (Primary consolidation)– वह क्रिया, जिसमें मृदा पिण्ड में लगातार स्थिर दाब (Sustained pressure) के कारण आयतन में कमी मुख्यत: मृदा रन्ध्रों से जल निकलने के कारण आती है तथा जिसमें रन्ध्र जल से मृदा कणों पर प्रतिबल स्थानान्तरण होता है, प्रारम्भिक संघनन कहलाता है। द्वितीय संघनन (Secondary consolidation)– मृदा रन्ध्रों से सम्पूर्ण अति द्रवीय स्थैतिक दाब (Excess hydrostatic pressure) लगाने के बाद भी मृदा के आयतन में कुछ कमी आती है जिसकी गति काफी धीमी रहती है, इसे द्वितीय संघनन (Secondary consolidation) कहते हैं, इसे ही विसर्पण संघनन (Creep Consolidation) कहते है । यह मृदा के कणों के पुनर्गठन (Rearrangement of particle) के कारण होता है। नोट- आयोग ने विकल्प (c) को सही माना है।

Explanations:

संहनन (Compaction):- किसी दिये गये जलांश पर मृदा रन्ध्रों से वायु के निकलने के कारण आयतन में कमी होना, संहनन कहलाता है। संघनन (Consolidation):- आधिक्य रन्ध्र जल दाब (Excess Pore Water Pressure) के कारण मृदा रन्ध्रों से जल के निकलने के परिणामस्वरूप, आयतन में कमी होने की घटना संघनन कहलाती है। प्रारम्भिक–संघनन (Initial consolidation)– आंशिक रूप से संतृप्त मृदा पिण्डों पर जब दाब पड़ता है तो प्रारम्भ में उनके आयतन में अपेक्षाकृत तेजी से कमी आती है जो मुख्यत: मृदा रन्ध्रों में उपस्थित वायु के दबने, निकलने एवं उसके जल में घुलने के कारण आती है। यह क्रिया प्रारम्भिक संघनन (Initial consolidation) कहलाती है। प्राथमिक संघनन (Primary consolidation)– वह क्रिया, जिसमें मृदा पिण्ड में लगातार स्थिर दाब (Sustained pressure) के कारण आयतन में कमी मुख्यत: मृदा रन्ध्रों से जल निकलने के कारण आती है तथा जिसमें रन्ध्र जल से मृदा कणों पर प्रतिबल स्थानान्तरण होता है, प्रारम्भिक संघनन कहलाता है। द्वितीय संघनन (Secondary consolidation)– मृदा रन्ध्रों से सम्पूर्ण अति द्रवीय स्थैतिक दाब (Excess hydrostatic pressure) लगाने के बाद भी मृदा के आयतन में कुछ कमी आती है जिसकी गति काफी धीमी रहती है, इसे द्वितीय संघनन (Secondary consolidation) कहते हैं, इसे ही विसर्पण संघनन (Creep Consolidation) कहते है । यह मृदा के कणों के पुनर्गठन (Rearrangement of particle) के कारण होता है। नोट- आयोग ने विकल्प (c) को सही माना है।