search
Q: ‘‘स्वधर्मे निधनं श्रेय:’’ यह श्रीमद्भगवद्गीता के किस अध्याय में है?
  • A. द्वितीय में
  • B. तृतीय में
  • C. चतुर्थ में
  • D. पञ्चम में
Correct Answer: Option B - ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय:’ यह श्रीमद्भगवद्गीता के तृतीय अध्याय से लिया गया है। अर्थात् - तृतीयोध्याय कर्मयोग में श्री कृष्ण ने गुण, स्वभाव और अपने धर्म की चर्चा की है। आपका जो गुण स्वभाव और धर्म है उसी में जीना और मरना श्रेष्ठ है, दूसरे के धर्म में मरना भयावह है।
B. ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय:’ यह श्रीमद्भगवद्गीता के तृतीय अध्याय से लिया गया है। अर्थात् - तृतीयोध्याय कर्मयोग में श्री कृष्ण ने गुण, स्वभाव और अपने धर्म की चर्चा की है। आपका जो गुण स्वभाव और धर्म है उसी में जीना और मरना श्रेष्ठ है, दूसरे के धर्म में मरना भयावह है।

Explanations:

‘स्वधर्मे निधनं श्रेय:’ यह श्रीमद्भगवद्गीता के तृतीय अध्याय से लिया गया है। अर्थात् - तृतीयोध्याय कर्मयोग में श्री कृष्ण ने गुण, स्वभाव और अपने धर्म की चर्चा की है। आपका जो गुण स्वभाव और धर्म है उसी में जीना और मरना श्रेष्ठ है, दूसरे के धर्म में मरना भयावह है।