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Q: स्वामी अग्रदास किस काव्यधारा के कवि हैं?
  • A. निर्गुण सन्त-काव्यधारा
  • B. प्रेमाश्रयी-काव्यधारा
  • C. रामभक्ति-काव्यधारा
  • D. कृष्णभक्ति-काव्यधारा
Correct Answer: Option C - व्याख्या : स्वामी अग्रदास राम भक्ति काव्यधारा के कवि हैं। इन्होंने ‘रसिक सम्प्रदाय’ की स्थापना की तथा अपनी गद्दी जयपुर के पास ‘रैवास’ में स्थापित किया। रसिक संप्रदाय में इन्हें ‘अग्रअली’ भी कहा जाता है। इनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ है- ध्यान मंजरी, रामध्यानमंजरी, कुंडलियाँ, अष्टायाम या रामाष्टायाम इत्यादि। जबकि निर्गुण संत काव्यधारा के प्रमुख कवि ‘कबीर दास’ तथा प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि ‘जायसी’ तथा कृष्ण भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि सूरदास जी हैं।
C. व्याख्या : स्वामी अग्रदास राम भक्ति काव्यधारा के कवि हैं। इन्होंने ‘रसिक सम्प्रदाय’ की स्थापना की तथा अपनी गद्दी जयपुर के पास ‘रैवास’ में स्थापित किया। रसिक संप्रदाय में इन्हें ‘अग्रअली’ भी कहा जाता है। इनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ है- ध्यान मंजरी, रामध्यानमंजरी, कुंडलियाँ, अष्टायाम या रामाष्टायाम इत्यादि। जबकि निर्गुण संत काव्यधारा के प्रमुख कवि ‘कबीर दास’ तथा प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि ‘जायसी’ तथा कृष्ण भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि सूरदास जी हैं।

Explanations:

व्याख्या : स्वामी अग्रदास राम भक्ति काव्यधारा के कवि हैं। इन्होंने ‘रसिक सम्प्रदाय’ की स्थापना की तथा अपनी गद्दी जयपुर के पास ‘रैवास’ में स्थापित किया। रसिक संप्रदाय में इन्हें ‘अग्रअली’ भी कहा जाता है। इनके द्वारा रचित प्रमुख ग्रन्थ है- ध्यान मंजरी, रामध्यानमंजरी, कुंडलियाँ, अष्टायाम या रामाष्टायाम इत्यादि। जबकि निर्गुण संत काव्यधारा के प्रमुख कवि ‘कबीर दास’ तथा प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि ‘जायसी’ तथा कृष्ण भक्ति काव्यधारा के प्रमुख कवि सूरदास जी हैं।