Correct Answer:
Option D - धरातल पर सूर्यातप की प्राप्त मात्रा में भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर परिवर्तन होता है अर्थात् भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर सूर्यातप की मात्रा तेजी से घटती जाती है। सूर्यातप की मात्रा में ऋतुवत परिवर्तन भी होता है। सूर्यातप के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों में सूर्य की किरणों का सापेक्ष तिरछापन, दिन की अवधि पृथ्वी से सूर्य की दूरी, सौर कलंक, वायुमंडल का प्रभाव (प्रकीर्णन, प्रत्यावर्तन, अवशोषण) प्रमुख है। अत: भूमिगत जल सूर्यातप के वितरण को प्रभावित नहीं करता।
नोट– भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर धरातल पर प्राप्त सूर्यातप
अक्षांश 0, 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70, 80, 90
सूर्यातप
(%) में 100, 99, 95, 88, 79, 68, 57, 47, 43, 42
D. धरातल पर सूर्यातप की प्राप्त मात्रा में भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर परिवर्तन होता है अर्थात् भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर सूर्यातप की मात्रा तेजी से घटती जाती है। सूर्यातप की मात्रा में ऋतुवत परिवर्तन भी होता है। सूर्यातप के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों में सूर्य की किरणों का सापेक्ष तिरछापन, दिन की अवधि पृथ्वी से सूर्य की दूरी, सौर कलंक, वायुमंडल का प्रभाव (प्रकीर्णन, प्रत्यावर्तन, अवशोषण) प्रमुख है। अत: भूमिगत जल सूर्यातप के वितरण को प्रभावित नहीं करता।
नोट– भूमध्यरेखा से ध्रुवों की ओर धरातल पर प्राप्त सूर्यातप
अक्षांश 0, 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70, 80, 90
सूर्यातप
(%) में 100, 99, 95, 88, 79, 68, 57, 47, 43, 42