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Q: ``सत्यर्थे पृथगर्थाया: स्वरव्यञ्जनसंहते: क्रमेण तेनैवावृत्तिर्यमकं विनिगद्यते।'' `यमक' की यह परिभाषा किस आचार्य ने दी है?
  • A. मम्मट
  • B. विश्वनाथ
  • C. राजशेखर
  • D. उपर्युक्त में से किसी ने भी नहीं
Correct Answer: Option B - ``सत्यर्थे पृथगर्थाया: स्वरव्यञ्जनसंहते: क्रमेण तैनेवावृतिर्यमकं विनिगद्यते।।'' यमक अलंकार की यह परिभाषा `साहित्यदर्पण' के रचयिता आचार्य विश्वनाथ ने दिया है।
B. ``सत्यर्थे पृथगर्थाया: स्वरव्यञ्जनसंहते: क्रमेण तैनेवावृतिर्यमकं विनिगद्यते।।'' यमक अलंकार की यह परिभाषा `साहित्यदर्पण' के रचयिता आचार्य विश्वनाथ ने दिया है।

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``सत्यर्थे पृथगर्थाया: स्वरव्यञ्जनसंहते: क्रमेण तैनेवावृतिर्यमकं विनिगद्यते।।'' यमक अलंकार की यह परिभाषा `साहित्यदर्पण' के रचयिता आचार्य विश्वनाथ ने दिया है।